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इसलिए पीएम मोदी ने उठाया, PoK और गिलगिट-बलूचिस्तान का मुद्दा

नई दिल्ली (15 अगस्त): लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने अपने भाषण में PoK और गिलगिट-बलूचिस्तान का जिक्र किया। उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर के इस हिस्से को जम्मू-कश्मीर का चौथा भाग कहा था। भारत के लिए ना केवल कश्मीर, बल्कि PoK भी उसका अभिन्न अंग है। आप कश्मीर और PoK की इस पूरी बहस के बारे में पूरी तरह नहीं जानते, तो परेशान होने की जरूरत नहीं।

जानें क्यों करता है भारत पूरे कश्मीर पर अपना दावा...

1. नक्शे में देखिए। जम्मू-कश्मीर के उत्तर में यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बलूचिस्तान का हिस्सा है। पश्चिम की ओर जाती जमीन की पट्टी मीरपुर-मुजफ्फराबाद है।

2. PoK के बारे में बातचीत ज्यादातर मीरपुर-मुजफ्फराबाद से इर्द-गिर्द घूमती है। जबकि भारत ने हमेशा से ही गिलगिट-बलूचिस्तान की स्वायत्तता को लेकर पाकिस्तान के रुख और उसके दिखावे का कड़ा विरोध किया है। गिलगिट-बलूचिस्तान क्षेत्र का सामरिक रूप से काफी महत्व है। चीन के साथ जुड़े होने के कारण यह भारत के लिए काफी अहम है। चीन ने 60 के दशक में गिलगिट-बलूचिस्तान होते हुए काराकोरम हाइवे बनाया था। इस हाइवे के कारण इस्लामाबाद और गिलगिट जुड़ गए थे। इससे आगे यह हाइवे चीन के जियांगजिंग प्रांत के काशगर तक भी जाती है।

3. चीन जियांगजिंग को एक हाइवे द्वारा बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने की योजना बना रहा है। चीन के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान में विभिन्न योजनाओं के लिए 46 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया है।

4. गिलगिट-बलूचिस्तान का 72,500 स्क्वेयर किलोमीटर का क्षेत्र ज्यादातर पहाड़ी इलाका है। इसी हिस्से में विश्व की दूसरी सबसे ऊंची चोटी K2 है। नंगा पर्वत भी इसी हिस्से में है।

5. मीरपुर-मुजफ्फराबाद क्षेत्र 13,300 स्क्वेयर किलोमीटर का इलाका है। यह पट्टी 400 किलोमीटर लंबा है और इसकी चौड़ाई 16 से 64 किलोमीटर है।

6. मोदी सरकार पिछले कुछ समय से PoK का मुद्दा बार-बार उठा रही है। PM ने शुक्रवार को PoK को जम्मू-कश्मीर का चौथा हिस्सा बताया। कश्मीर घाटी में तनाव की स्थिति को भुनाने की पाकिस्तान की कोशिश का यह करारा जवाब था। मोदी ने शिया बहुत गिलगिट-बलूचिस्तान क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया।

7. भारत लगातार गिलगिट-बलूचिस्तान क्षेत्र और मीरपुर में फर्जी सरकार का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के झूठ को उठाता रहता है। वहां हाल ही में हुए चुनाव को तो पाकिस्तान की विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो ने भी फर्जी बताया था। यहां के चुनाव नतीजे में हमेशा पाकिस्तान की सत्ता में काबिज पार्टी को ही जीता हुआ दिखाया जाता है। इस बार के चुनाव में भी नवाज शरीफ की पार्टी को यहां से विजेता बताया गया। इसपर टिप्पणी करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, 'गिलगिट-बलूचिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर ही भारत का अभिन्न अंग है। गिलगिट-बलूचिस्तान में भारत के समर्थन और पाक-विरोधी रैलियां हो रही हैं। मोदी चाहते हैं कि विदेश मंत्रालय विदेश में रहने वाले PoK के परिवारों से संपर्क करे।

8. 1947 में कश्मीर के महाराजा ने भारत और पाकिस्तान में शामिल ना होकर, आजाद ही रहने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि उनकी मुस्लिम बहुल प्रजा भारत के साथ जुड़ने का विरोध करेगी। नेहरू ने गिलगिट-बलूचिस्तान क्षेत्र से पाकिस्तानी फौजों को हटाने जाने पर जोर दिया।

9. 31 अक्टूबर 1947 को जब पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया और बारामूला में घुस आई, तो महाराजा हरि सिंह परेशान हो गए। उन्होंने भारत से मदद मांगी और भारत के साथ मिलने के समझौते पर दस्तखत कर दिए। भारत ने हवाई रास्ते ने वहां अपनी फौज भेजी।

10. अप्रैल 1948 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पाक को अपने पैर पीछे खींचने कहा। UN ने भारत से भी अपनी सेना की संख्या कम करने को कहा। इन शर्तों को माने जाने के बाद वहां जनमत संग्रह कराने जाने की बात तय हुई।

11. 1970 में पाकिस्तान ने उत्तरी इलाकों, मीरपुर-मुजफ्फराबाद सेक्टर्स विभाजन कर दिया। गिलगिट-बलूचिस्तान को पाक अपना उपनिवेश कहता है।

12. भारत का कहना है कि PoK कश्मीर रियासत का ही हिस्सा है। ऐसे में भारत उसे अपना अभिन्न अंग कहता है। जिस हिस्से को भारत PoK कहता है, वह पूर्व कश्मीर रियासत का ही वह हिस्सा है जो कि 22 अक्टूबर 1947 से ही पाकिस्तान के कब्जे में है। पाकिस्तान समर्थित कबीलों द्वारा जम्मू-कश्मीर पर हमला किए जाने के बाद से ही उसपर पाक ने कब्जा जमाया हुआ है।

13. 1970 से पहले मीरपुर-मुजफ्फराबाद सेक्टर में अलग-अलग प्रशासनिक इंतजाम थे। 1970 में यहां मतदान का अधिकार दिया गया और राष्ट्रपति शासन व्यवस्था लागू की गई। यह 4 साल तक चला। इसके बाद यहां एक तथाकथित संसदीय प्रणाली लागू की गई। यही व्यवस्था अब भी यहां लागू है, लेकिन उसमें कुछ संशोधन जरूर हुए हैं। 1975 से यह क्षेत्र अपने लिए चुनाव के द्वारा एक 'प्रधानमंत्री' चुनता है। इसके पास 6 सदस्यों की एक काउंसिल भी है, जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री करते हैं। इन 6 में से 3 सदस्य जहां पूर्व अधिकारी होते हैं, वहीं बाकी के 3 सदस्यों को पाक के PM नामांकित करते हैं। जानकार अक्सर इन क्षेत्रों की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करते हैं।

14. गिलगिट-बलूचिस्तान को पाकिस्तान विवादित क्षेत्र कहता है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दावा करता है कि वह इस क्षेत्र के लोगों की आजादी का समर्थन करता है, लेकिन असलियत यह है कि गिलगिट-बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है। इस्लामाबाद इस हिस्से को अपना घोषित नहीं कर सकता है। लंबे समय तक पाक के संविधान में इस हिस्से का कोई निश्चित स्टेटस ही नहीं था। GB ऑर्डर 2009 के द्वारा मीरपुर-मुजफ्फराबाद की व्यवस्था की ही तरह यहां भी व्यवस्था कायम कर दी गई है। पाक चाहे जो कहे, असलियत यही है कि यह क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में है।

15. भारत कहता है कि PoK और गिलगिट-बलूचिस्तान का असली नेतृत्व असल में पाकिस्तान के नियंत्रण में ही है। यहां पाक सेना की भारी मात्रा में मौजूदगी है। जब पाकिस्तान ने चीन को PoK का हिस्सा दिया, तब उसने इस क्षेत्र की स्वायत्तता के साथ धोखा किया। इस इलाके की आबादी में भी काफी बदलाव आया है। मूल आबादी की जगह पख्तूनों को यहां बसने के लिए बढ़ावा दिया जाता है।


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