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PMC बैंक घोटाला: सुप्रीम कोर्ट का याचिका पर सुनने से इनकार, हाईकोर्ट जाने को कहा

पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों का याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 अक्टूबर): पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों का याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बैंक के खाताधारक निराश नजर आ रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि उनको न्याय व्यवस्था पर ही भरोसा है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट भेजा जा रहा है। हाईकोर्ट अगर लोअर कोर्ट भेजता है तो न्याय मिलने में काफी देरी होगी। साथ ही लोगों का कहना है कि इंश्योरेंस की रकम जो एक लाख रुपेय से बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि उनका पैसा वापस मिल सके।

आपको बता दें कि पीएमसी बैंक के खाताधारकों की मुश्किलें को लेकर दिल्ली के बिजोन कुमार मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। इस अर्जी पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। बिजोन कुमार मिश्रा ने अपनी याचिका में 15 लाख खाताधारकों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए उनके लिए 100 फीसदी इंश्योरेंस कवर की मांग की थी। साथ ही कहा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पीएमसी बैंक में जमा धनराशि की निकासी पर तय की गई पाबंदी खत्म करने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में ग्राहकों को जरूरत के मुताबिक रकम निकालने की छूट दिए जाने की अर्जी थी।

क्या है पीएमसी बैंक घोटाला..?

बताया जा रहा है कि पीएमसी बैंक में लंबे अरसे वित्तिय अनियमितता चल रही थी। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जॉय थॉमस की अगुआई में बैंक मैनेजमेंट ने कंस्ट्रक्शन कंपनी एचडीआईएल को फंड दिलाने के लिए हजारों फर्जी खाता खोले हुए थे। यह खेल करीब 10 साल से चल रहा था। रेगुलेटर को शुरुआत में पता चला कि थॉमस और मैनेजमेंट के कुछ लोगों ने मिलकर 4,226 करोड़ रुपये (बैंक के टोटल लोन का 73% हिस्सा) सिर्फ एक ही कंपनी HDIL को दिए थे, जो अब दिवालिया हो गई है। आरबीआई ने इसके कामकाज पर रोक लगा दी। उसने डिपॉजिटरों के पैसे निकालने की लिमिट तय कर दी। इसके बाद सामने आया कि घोटाला 4,226 करोड़ का नहीं, बल्कि 4,355 करोड़ रुपये का है। अब सामने आया है कि पीएमसी बैंक लोन घोटाला 6500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।

 

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