चीन को PoK का जवाब देने हनोई पहुंचे मोदी

नई दिल्ली(3 सितंबर): पीएम मोदी वियतनाम के बाद जी-20 सम्मिट में भाग लेने चीन रवाना हो जाएंगे। आज ही वो चीन पहुंचेंगे। 

- वियतनाम पहुंचने पर पीएम का जबर्दस्त स्वागत हुआ। पीएम यहां सबसे पहले अप्रवासी भारतीयों से मिले। 

- मोदी के इस दौरे पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं। सबसे ज्यादा अगर किसी की नजरें जमी हैं..तो वो है चीन।

- दक्षिण चीन सागर में चीनी दादागीरी का वियतनाम कड़ा विरोध कर रहा है...और भारत इस मुद्दे पर वियतनाम के रुख का समर्थन कर रहा है। जिससे चीन परेशान है। 

- लगभग 300 किलोमीटर तक मार करने वाली ब्रम्होस … आने वाले दिनों में भारत और वियतनाम की दोस्ती का आधार बनेगी। जिसे खरीदने में वियतनाम की गहरी दिलचस्पी है।

- चीन इसे कतई पसंद नहीं करेगा लेकिन भारत और वियतनाम दोस्ती और साझेदारी के एक नए सफर पर निकल चुके हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में वियतनाम एक मात्र देश है जो चीन से चार लड़ाइयां लड़ चुका है। और कहा जा रहा है कि ड्रैगन की पाकिस्तान के साथ जुगलबंदी को कूटनीतिक तरीके से कमजोर करने के लिए वियतनाम की खास अहमियत है।

- अपनी जांबाजी के लिए जाने जाने वाले वियतनामियों ने सत्तर के दशक में अमेरिका के दांत खट्टे कर दिए थे और उस वक्त उनकी लड़ाई में भारत ने अमेरिका के खिलाफ उन्हें नैतिक समर्थन दिया था। 

-दक्षिण चीन सागर में हाइड्रोकार्बन  का बड़ा भंडार है और चीन के विरोध के बावजूद भारतीय कंपनियां वहां सक्रिय हैं। चीन ने इलाके में अपने Shenyang और Xian जैसे खतरनाक लडा़कू विमान उतार रखे हैं … लेकिन इसके बावजूद वियतनाम बेखौफ है। वो चाहता है कि भारत South China Sea में उसके अधिकार के 200 nautical mile के इलाके में तेल खनिज और गैसे की खोज करे।और ये बात चीन को बेतरह खल रही है ।

- चीन के दौरे से ठीक पहले पीएम मोदी का वियतनाम दौरा ड्रैगन के लिए एक संदेश है कि अगर वो पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों को दी जा रही शह पर आंखें मूदता रहेगा...और पाक अधिकृत कश्मीर में अपना दखल बढ़ाने की हिमाकत करता रहेगा...तो हिंदुस्तान को भी मुंहतोड़ जवाब देने आता है...और कूटनीति कि बिसात पर ये दांव उसको भारी पड़ सकता है।