"देश में 1965 जैसा आक्रोश, सेना बोलती नहीं बल्कि करती है"

नई दिल्ली (25 सितंबर): पाकिस्तान के खिलाफ लोगों के गुस्से की तुलना 1965 के युद्ध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को निश्चित तौर पर दंडित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना बोलती नहीं, बल्कि पराक्रम दिखाने में विश्वास रखती है।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह कायरतापूर्ण कृत्य पूरे देश को झकझोरने के लिए काफी था। इसको लेकर देश में शोक और आक्रोश दोनों है। यह क्षति सिर्फ उन परिवारों की नहीं है जिन्होंने अपने बेटे, भाई और पति खोए हैं। यह क्षति संपूर्ण देश की है। इसलिए आज मैं वही कहूंगा जो मैंने उस दिन (घटना के दिन) भी कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि दोषियों को निश्चित रूप से दंडित किया जाएगा।'

भारतीय सेना में विश्वास प्रकट करते हुए मोदी ने कहा कि वह अपने पराक्रम से इस तरह के सभी षडयंत्रों को विफल कर देगी। उन्होंने कहा, 'ये (सैनिक) वे लोग हैं जो अदम्य साहस दिखाते हैं ताकि 125 करोड़ लोग शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें। हमें अपनी सेना पर गर्व है। लोगों और नेताओं को बोलने के अवसर मिलते है और वे ऐसा करते भी हैं। परंतु सेना बोलती नहीं है। सेना अपना पराक्रम दिखाती है।'

प्रधानमंत्री ने 11वीं कक्षा के एक छात्र का संदेश पढ़ा जिसने उरी की घटना को लेकर आक्रोश प्रकट किया था और इसको लेकर कुछ करने की इच्छा जताई थी। इस छात्र ने काफी सोचने के बाद यह संकल्प लिया कि वह रोजाना तीन घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करेगा ताकि देश के लिए योगदान दे सके।'

मोदी ने इस छात्र के 'रचनात्मक विचार' की सराहना करते हुए कहा, 'देश के लोगों में जो आक्रोश है, उसका बहुत महत्व है। यह देश के जागने का प्रतीक है। यह आक्रोश कुछ करने जैसा है, जब 1965 युद्ध (पाकिस्तान के साथ) शुरू हुआ था तब लाल बहादुर शास्त्री देश का नेतृत्व कर रहे थे, उस समय देश में इसी तरह की भावना और आक्रोश था। वह देशभक्ति का ज्वार था।'