प्रधानमंत्री मोदी के स्‍टार्ट-अप के सपने को युवा ला रहे हैं हकीकत में...

नई दिल्‍ली (06 अक्‍टूबर) : भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के सपने के साकार करने में अब भारत के युवा सामने आने लगे हैं। तभी तो प्रधानमंत्री के द्वारा चलाये जा रहे, स्‍टार्ट-अप इंडिया,स्किल इंडिया और क्‍लीन इंडिया में देश के युवा बढ़-चढ़कर हिस्‍सा ले रहे हैं। अब तो देश के युवा यह भी सोचने लगे हैं कि, दुसरों के यहां पर अपने स्किल और आइडियाज को क्‍यों शेयर करें। बल्कि अपना ही कुछ स्‍टार्ट-अप करके दूसरों लोगों को रोजगार दे।

 

वैसे हम आपको बता दें कि, जबसे प्रधानमंत्री ने स्‍टार्ट-अप इंडिया प्रोग्राम लेकर आये हैं, तभी से भारत में स्‍टार्ट-अप की बहार आ गई है। एक सर्वे के मुताबिक, इस प्रोग्राम के लांच के बाद एक‍ रिकार्ड रहा है कि, इतने अधिक मात्रा में स्‍टार्ट-अप हुयें है जो अ‍भी तक कहीं भी नही हुये हैं। इसके अलावा यह भी ख़बर है कि, शुरू हुये स्‍टार्ट-अप में करीबन 90 फीसदी सक्‍सेस नही हो पाये हैं केवल 10 फीसदी ही ऐसे स्‍टार्ट-अप हैं जो सक्‍सेस हो पाये हैं।

उन्‍हीं में से एक ऐसा ही एक स्‍टार्ट-अप के बारें में हमें जानकारी मिली है जो कि, एक उदाहरण के तौर में साबित होता है। एक छोटी सॉफ्टवेर कंपनी माय वेबसलूशन (www.mywebsolution.in,www.mywebsolution.co.in) का उदाहरण है इस स्‍टार्ट-अप को दो लोगों ने शुरू‍ किया था, दोनों अपने-अपने काम में माहिर थे, दोनों की फील्‍ड में जान-पहचान बन गई। दोनों ही अपने फील्‍ड में माहिर थे तो उनहोने सोंच लिया की, वह अपना खुद का स्‍टार्ट-अप की शुरूआत करेंगे। लेकिन उनके दिमाग में यह गूंज रहा था कि, सोच तो लिया कुछ काम शुरू करने के लिये, लेकिन कंपनी शुरू करने से पहले बहुत से रजिस्‍ट्रेशन करने पड़ते है यह सब आसानी से तो नही हो सकता है। लेकिन तभी उसी समय प्रधानमंत्री मोदी ने स्‍टार्ट-अप इंडिया प्रोग्राम को लांच किया था। प्रधानमंत्री के इस स्‍टार्ट-अप इंडिया से प्रेरित होकर दोनों ने अपनी एक छोटी कंपनी शुरू करने का फैसला किया और साथ ही “स्किल इंडिया” से प्ररित होकर सॉफ्टवेर डेवलपमेंट की मुफ्त ट्रेनिंग देने का भी फैसला लिया। लेकिन उसके लिए उनको काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। क्‍योंकि नए व्यापार में फाइनेंसियल जरूरतें ही काफी होती है इसे तो बेसिक जरूरत भी कह सकते हैं बगैर पैसो के तो कुछ भी नही हो सकता है।  और साथ मुफ्त ट्रेनिंग देने के लिए भी बहुत से रिसोर्सेज की जरूरत पड़ती है।

लेकिन कहते हैं ना कि, अगर इंसान कुछ भी ठान लेता है तो उसे पाने के लिये कुछ भी कर सकता है। मुसीबते तो शुरूआत में आती हैं अगर इंसान की नज़र केवल मंजिल पर हो तो, उसके दूर मंजिल भी पास नज़र आने लगती है।

 

इसके संदर्भ में मिस्‍टर मनोज जो की मार्केटिंग एंड सेल्स हेड है वो कहते है कि, व्यापार में आप अपने बिज़नेस और पर्सनल फाइनेंस को अलग–अलग नहीं रख सकते |

स्‍टार्ट-अप शुरू करने पर पर्सनल फाइनेंस पर असर पड़ता ही पड़ता है वो बताते है कि,इसके लिए कुछ बातों का ध्यान जरुर रखना चाहिये

-बिज़नेस के लिए अलग से रखें इमरजेंसी फंड |

-सभी तरह के रिस्क के लिए उचित बिमा कवर ले |

-कर्मचारियों की तरह ही अनुशासित होकर काम करें |

वहीं, इस स्‍टार्ट-अप में अपनी टेक्निकल हेड मिस्‍टर सचिन बताते है कि, टेक्नोलॉजी को जितना इस्‍तेमाल करें उतनी ही बढती है | तो कभी भी वो किसी कार्य को लेकर नेगेटिव न होकर एक पॉजिटिव वे में और उसको मैनेज करके समय पर पूरा करते है तथा अपने कर्मचारियों को भी एक पॉजिटिव सोच के साथ अनुशासित तरीके से काम करने की सलाह देते रहते है तथा सिखाते भी है किसी काम को किस तरह किया जाता है | किसी भी कार्य को उसकी तय सीमा से पहले और एक क्वालिटी वर्क के लिए उन्हें जाना जाता है |

 

इस स्‍टार्ट-अप के दोनों मेंबर्स ने यह बताया कि, वह प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और सटार्ट-अप इंडिया को बहुत ज्‍यादा प्रभावित है प्रधानमंत्री के इस प्रोग्राम ने हम जैसे युवाओं को रोजगार दिया है या कहे कि, अपने कदमों पर खड़ा होने और दूसरे जरूरतमंदो तक रोजगार पहुचाने का एक अच्‍छा और सरल माध्‍यम दिया है। ताकि कोई भी अपने बिजनेस की शुरूआत कर सकें।