सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित हुए पीएम मोदी, कहा-ये अवार्ड पूरे देश का सम्मान


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 फरवरी): दक्षिण कोरिया के यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी को सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले प्रधानमंत्री मोदी पहले भारतीय है। आपको बता दें कि प्रतिष्ठित सियोल शांति पुरस्कार 1990 से दिया जा रहा है। यह पुरस्कार अब तक संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल जैसी हस्तियों को मिल चुका है। इस पुरस्कार के लिए दुनियाभर से कुल 1300 नामांकन आए थे। अवॉर्ड कमेटी ने उनमें से 150 उम्मीदवारों को अलग किया। इन 150 उम्मीदवारों में से प्रधानमंत्री मोदी का चयन किया गया। कमेटी ने पीएम मोदी को ‘द परफेक्ट कैंडिडेट फॉर द 2018 सियोल पीस प्राइज’ कहा है।


प्रधानमंत्री मोदी ने सोल शांति पुरस्कार को भारत की सवा सौ करोड़ जनता को समर्पित किया और भारत की तरफ से साउथ कोरिया का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने पुरस्कार के साथ मिलने वाली तकरीबन 1 करोड़ 30 लाख रुपये की धनराशि नमामि गंगे परियोजना को समर्पित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'यह पुरस्कार मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि भारत के लोगों के लिए है, जो सफलता भारत ने पिछले 5 वर्षों में हासिल की है, वह 130 करोड़ लोगों के कौशल द्वारा संचालित है।'


इससे पहले अपनी दक्षिण कोरिया यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी। जिसके बाद उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मुलाकात की। वहीं अपने दक्षिण कोरिया यात्रा के पहले दिन गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी सियोल के योनसेई विश्वविद्यालय में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति मून जे-इन प्रथम महिला किम जूंग-सूक और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की-मून भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि बापू की प्रतिमा का अनावरण करना सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जबकि हम बापू की 150वीं जयंती मना रहे हैं, इसका विशेष महत्व हो जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बापू के विचारों और सिद्धांतों में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन जैसी मानव जाति के समक्ष आज मौजूद दो सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटने की ताकत है। मोदी ने कहा कि बापू के जीवन और विचारों ने हमें यह बताया कि कैसे हम प्रकृति के साथ सद्भाव से रहते हुए कार्बन फुटप्रिंट कम कर सकते हैं. गौरतलब है कि योनसेई विश्वविद्यालय दक्षिण कोरिया के सर्वाधिक प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है।