जानिए, उत्तर प्रदेश के लिए क्या है मोदी का प्लान- 'पूरब-पश्चिम'

राजीव रंजन, मानस श्रीवास्तव, नई दिल्ली (25 मई): कल जब मोदी सरकार के दो साल होंगे। तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रैली करेंगे। पश्चिमी यूपी में मोदी की रैली होगी तो उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौजूद इलाहाबाद में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी करने वाली है। कहा जा रहा है कि ये बीजेपी का प्लान पूरब-पश्चिम है। जिसमें यूपी की 403 में से 217 सीटें आती हैं। बीजेपी जानती है कि यूपी के इन दो ध्रुवों को साध लिया गया तो लोकसभा जैसा करिश्मा विधानसभा चुनाव में करना मुश्किल नहीं होगा। मोदी के प्लान पूरब-पश्चिम में पहले बात करते हैं पश्चिमी हिस्से की रणनीति की। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर शहर। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में होर्डिंग से पटा हुआ है। उन्हीं में एक होर्डिंग कहती है कि सुन रहा है ना तू, आ रहा हूं मैं। ये बात सिर्फ सहारनपुर के लिए इस वक्त मत मानिए क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रास्ते ही मोदी यूपी में वो विजय रथ दौड़ाना चाहते हैं जो सीधे लखनऊ तक पहुंचे। सीधे शब्दों में समझिए कि पश्चिम यूपी का सहारनपुर ही क्यों चुना मोदी ने। 

यूपी में बीजेपी के अभी जितने विधायक हैं उनमें से आधे पश्चिमी यूपी से आते हैं। 2012 में जब अखिलेश की लहर में भी बीजेपी के जब आधे विधायक पश्चिमी यूपी से आए। तो बीजेपी जानती है कि मोदी लहर की शुरुआत भी यूपी के पश्चिमी हिस्से से ही करनी चाहिए। क्योंकि उत्तर प्रदेश का ये वही हिस्सा है, जहां वोटों का ध्रुवीकरण कर लोकसभा में बीजेपी करिश्मा कर चुकी है। 

मोदी का पूरब-पश्चिम प्लान कैसे चल रहा है। इसकी बानगी देखिए। दो महीने पहले मोदी ने पश्चिमी यूपी के बरेली में रैली की। फिर मोदी पूर्वी यूपी के बलिया में उज्जवला योजना के लिए पहुंचे। मोदी पश्चिमी यूपी के नोएडा में दो कार्यक्रम कर चुके हैं। तो पूर्वी यूपी में आने वाले अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी जाते रहे हैं। अब खबर है कि पश्चिमी यूपी में जयंती, दिवस के नाम पर चुनाव तक हर महीने सीधे प्रधानमंत्री की रैली होगी।  

विरोधी मोदी के यूपी में पूरब-पश्चिम प्लान की आहट पाते ही संभल गए हैं। समाजवादी पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति से बच रही है। विरोधी कह रहे हैं कि बीजेपी पश्चिमी यूपी में धुर्वीकरण के सहारे ही आगे बढ़ना चाहती है। पश्चिमी यूपी में हिंदू-मुस्लिम वोटबैंक की लड़ाई ही सबसे बड़ी होती है। यही वजह रही कि बीजेपी ने इसके आसरे मायावती को उन्हीं के सबसे बड़े गढ़ में लोकसभा चुनाव के दौरान डिब्बाबंद कर दिया था। लोकसभा चुनाव में विवादित बयान देने वाले इमरान मसूद को कांग्रेस आगे कर रही है। ऐसे में मोदी की रैली पश्चिमी यूपी में यूपी चुनाव के लिए बीजेपी के मुताबिक माहौल तैयार करेगी। 

दिल्ली से सहरानपुर टू इलाहाबाद होते हुई बीजेपी लखनऊ का लालकिला फतह करना चाहती है। जो डेढ़ दशक से ज्यादा से बीजेपी के हाथ से दूर है। क्योंकि लखनऊ ही फैसला कर सकता है कि 2019 में दिल्ली किसकी होगी ?

यूपी का जंग जीतने के लिए मोदी सरकार बीजेपी हर तीर आजमाएंगी। 2017 का नतीजा मोदी सरकार के कामकाज का पहला बड़ा फैसला होगा।

पश्चिमी हिस्से से आगाज होगा। तो यूपी के पूर्वी हिस्से से मोदी की रणनीति परवाज़ भरेगी। इसके लिए इलाहाबाद को चुना गया है। जहां जल्द ही बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है। इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद किसान रैली होगी। कहने को तो ये किसान रैली होगी। लेकिन बीजेपी की नजर पटेल, कुशवाहा, कुर्मी बेल्ट पर होगी।  

कभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति का एपी सेंटर रहा इलाहाबाद इन दिनों सुर्खियों में है। पिछले ऋषि कपूर के गांधी परिवार को दिए गए बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस अंदाज में विरोध किया था। शौचालय का नाम ऋषि कपूर के नाम पर रख दिया। वही इलाहाबाद जो अवध और पूर्वांचल दोनों को टच करता है अब बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। 

इलाहाबाद में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने वाली है। इसके साथ ही बीजेपी ये संदेश भी दे पाएगी कि यूपी अध्यक्ष बने केशव प्रसाद मौर्य सिर्फ रबर स्टैम्प नहीं हैं। लगे हाथ पूर्वांचल तक बीजेपी पकड़ और मजबूत कर पाएगी। इलाहाबाद मे इस साल इंदिरा गांधी का जन्मशताब्दी वर्ष भी मनाया जाना है। कांग्रेस नवंबर में इलाहाबाद में बड़े जमावड़े की तैयारी मे है। तब कांग्रेस कहती है कि इलाहाबाद में मोदी कुछ नहीं कर पाएंगे। 

विरोधी जो भी कहें, बीजेपी की ऱणनीति साफ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे भी 100 से ज्यादा विधानसभा की सीटे आती है। ऐसे मे पूर्वांचल की 117 औऱ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा सीटे जोड ली जाये तो यूपी मे बड़ी पारी खेली जा सकती है।