पीएम मोदी ने ब्लैकमनी पर ऐसे बनाई रणनीति, लगा 6 महीने का समय

नई दिल्ली (9 नवंबर): ब्लैकमनी पर मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक अचानक नहीं हुई। इसके लिए एक सीक्रेट एक्शन प्लान तैयार किया गया था। जिस पर महीनों काम चला। लेकिन अलग-अलग लोगों का दावा है कि पीएम मोदी को ऐसा करने की पहली सलाह उन्होंने ही दी थी। दावा करनेवालों में इंजीनियर से लेकर योगगुरु तक शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि 500 और हजार के नोट को बैन करने का फैसला मोदी सरकार ने 6 महीने के होमवर्क के बाद लिया। इसे कैसे लागू किया जाए, इस पर 2 महीने तक मीटिंग का लंबा सिलसिला चला और जब इसे लागू करने का वक्त आया तो आखिरी वक्त तक इसके ऐलान को सीक्रेट रखा गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर तक को पीएम की घोषणा के बाद फैसले की खबर लगी।

लेकिन पुणे की एक संस्था अर्थक्रांति का दावा है कि मोदी सरकार ने ये फैसला उसकी सलाह पर लिया। अर्थक्रांति संगठन से सामाजिक क्षेत्र में काम करनेवाले चार्टर्ड अकाउंटेट्स और इंजीनियर्स जुड़े हैं। इसके प्रमुख अनिल बोकिल की मानें तो पीएम मोदी को उन्होंने दो बड़ी सलाह दी थी और इससे जुड़े प्रस्ताव का पूरा ड्राप्ट दिया था। बोकिल का दावा है कि 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले वो नरेंद्र मोदी से मिले थे। ढाई साल बाद पीएम मोदी ने उनके प्रस्तावों में से एक नोटों को बैन करने की सलाह मान ली और अब टैक्स सिस्टम में सुधार की बारी है।

अनिल बोकिल ऐसा दावा करनवाले पहले शख्स नहीं। सरकार के फैसले के पीछे अपनी सलाह का दावा बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी भी कर चुके हैं और योगगुरु रामदेव भी कह चुके हैं कि पीएम मोदी को उन्होंने काफी पहले ही 500 और 1000 के नोटों को बैन करने की राय दी थी।

उधर कुछ अर्थशास्त्री मोदी सरकार के इस फैसले को कालेधन के खात्मे का अचूक उपाय नहीं मानते। उनका दावा है कि रुपए की ताकत कमजोर हो सकती है और दुनिया भर में ये संदेश जा सकता है कि भारत को अपनी ही करेंसी पर भरोसा नहीं।