निर्गुट सम्मेलन में नहीं जाएंगे PM मोदी

नई दिल्ली (14 सितंबर): निर्गुट देशों के संगठन Non-Aligned Movement (NAM) में भारत ने बड़ी भूमिका निभाई थी, लेकिन अब इन देशों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं जाएंगे।

1979 में चौधरी चरण सिंह को छोड़कर किसी भी पीएम ने यह सम्मेलन नहीं छोड़ा है। एनडीए की पुरानी सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री संगठन के सम्मेलनों में दो बार शिरकत की थी। मोदी के पीएम बनने के बाद संगठन का यह पहला सम्मेलन है। इसके पीछे अमेरिका से नजदीकी का हवाला दिया जा रहा है।

पिछले साल जुलाई में विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी रणनीति में बदलाव कर 'संतुलन बिठाने वाली ताकत' की जगह 'अगुवा ताकत' बन रहा है। 1961 में बने निर्गुट देशों के संगठन की स्थापना में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस संगठन में वैसे विकासशील देश शामिल हुए जो अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के आपसी शीतयुद्ध से दूर रहना चाहते थे।

बहरहाल, सोवियत संघ के बंटवारे के बाद दुनिया के दो ध्रुवों में बंटने की स्थिति खत्म हो गई। इसके बावजूद आज भी करीब 120 देश निर्गुट मुहिम के सदस्य हैं। अमेरिका को शुरू से ही निर्गुट संगठन के विरोधी देश के तौर पर देखा जाता रहा है।