सुस्त पड़ा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह मिशन

भूपेंद्र सिंह/अशोक तिवारी, लखनऊ (2 मई): लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन स्वच्छ भारत के तहत हर घर में टॉयलेट का सपना दिखाया था, लेकिन सरकार की उस मुहिम को इस साल बड़ा झटका लगा है। आंकड़े कहते हैं कि शहरी इलाकों में शौचालय बनाने के इस साल के निर्धारित लक्ष्य से काम 76 फीसदी पीछे है। सिर्फ 24 फीसदी टारगेट ही पूरा हुआ है। जिन राज्यों में हुआ है वो ज्यादातर बीजेपी शासित राज्य हैं, बाकी जगहों पर सियासत हावी है।

लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत बड़ी बात कही थी। देश के हर घर में शौचालाय बनवाने की बात कही थी। 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन मोदी सरकार की इस मुहिम को बड़ा झटका लगा है। जो आंकड़े आए हैं वो सरकार के लिए वेक अप कॉल की तरह हैं।

मार्च 2016 तक शहरी इलाकों में 25 लाख टॉयलेट बनाने का लक्ष्य था। जिसमें से सिर्फ 6 लाख यानी 24 फीसदी शौचालय ही देश में बन पाए हैं। मोदी के मिशन को सबसे ज्यादा पूरा करने में गुजरात नंबर वन बना हुआ है। टॉप पांच के राज्यों में चार बीजेपी शासित राज्य हैं। गुजरात में दिसंबर 2015 तक 3,27,880 निजी शौचालयों का निर्माण किया गया जो किसी भी दूसरे राज्य से ज्यादा है। जिसका श्रेय लेने में बीजेपी की सरकार कहीं से पीछे नहीं है।  

हालांकि जब देश के बाकी हिस्सों में नजर डालते हैं तो पाते हैं कि मोदी सरकार के मिशन को पूरा करने में, उसे ढीला करने में दूसरी पार्टियों की तरफ से शासित राज्य अपना मानों पूरा जोर लगाए हुए हैं। देश के 11 राज्यों में तो एक भी टॉयलेट अब तक नहीं बनवाया गया है। असम, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, त्रिपुरा जैसे राज्य इस लिस्ट में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश ने जरूर 1 साथ 78 हजार शौचालय बनवाकर अपनी पोजिशन सुधारी है।

सरकार ने खुद अपने आंकड़ों बताया है कि देश के शहरों में अब भी 19 फीसदी लोग और गांवों में तो 57 फीसदी लोगों के पास इस्तेमाल करने के लिए शौचालय तक नहीं है। ऐसे में क्या जब मोदी सरकार की मुहिम पहले ही साल में 76 फीसदी पीछे चल रही है तो क्या 2019 तक टारगेट पूरा हो पाएगा ?