INSIDE STORY: #SAARC में PAK जा सकते हैं PM मोदी, जानिए- भारत ने जब जब की शांति की पहल, पाकिस्तान ने दिया धोखा...

डॉ. संदीप कोहली, 

नई दिल्ली (6 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान जा सकते हैं। नवंबर में पाकिस्तान में होने वाला है सार्क सम्मेलन। इस तरह की खबरें पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त के हवाले से आ रही है। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय से इस बात की अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। पीएम मोदी अगर सार्क सम्मेलन में जाते हैं को उनकी यह यात्रा कश्मीर में अशांति के मौजूदा माहौल के बीच होगी। हाल ही में जी-20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने दक्षिण एशिया में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। अगस्त 2016 की शुरुआत में सार्क कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए गृहमंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान दौरा काफी विवा‍दों में रहा था। दौरे पर दोनों देशो के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। राजनाथ सिंह बिना लंच किए वहां से लौट आए थे। इसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सार्क कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि 19वां सार्क शिखर सम्मेलन 9 और 10 नवंबर को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाला है। कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पीएम मोदी को इस्लामाबाद में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था। पिछले सवा दो सालों में भारत पाकिस्तान के संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। भारत ने जब-जब की शांति की पहल पाकिस्तान ने दिया धोखा... 

भारत-पाकिस्तान संबंध... पिछले दो सालों में आए उतार-चढ़ाव

मई 2014 : पहली मुलाकात- 26 मई को नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में नवाज शरीफ शामिल। PM मोदी ने PM शरीफ की मां के लिए तोहफे में शॉल दी। अगस्त (फॉरेन सेक्रेटरी बातचीत रद्द) :पाक हाईकमिश्नर अब्दुल बासित की कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात, इस्लामाबाद में बातचीत रद्द। सितंबर :नवाज शरीफ ने यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी जनरल बान की मून के साथ मुलाकात में कश्मीर का मुद्दा उठा दिया। नवंबर : दूसरी मुलाकात- PM मोदी-नवाज नवंबर में सार्क समिट के दौरान मिले। लेकिन दोनों के बीच औपचारिक बातचीत नहीं हुई। मार्च 2015 : फॉरेन सेक्रेटरी एस जयशंकर ने पाकिस्तान के फॉरेन सेक्रेटरी एजाज अहमद चौधरी से मुलाकात की। जून : PM मोदी बांग्लादेश दौरे पर कहा, पाकिस्तान ने आतंक फैलाकर भारत की ‘नाक में दम’ कर रखा है। पाकिस्तान ने इस बयान पर कड़ा एतराज जताया। जुलाई :पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान एटम बम का इस्तेमाल करने से नहीं चूकेगा। 10 जुलाई : तीसरी मुलाकात- ऊफा (रूस) में PM मोदी-शरीफ के बीच 8 महीने बाद मुलाकात हुई, एनएसए और डीजीएमओ लेवल की बातचीत भी तय हुई। 12 जुलाई :ऊफा समझौते से मुकरा पाकिस्तान, एनएसए सरताज अजीज ने कहा कश्मीर नहीं तो बातचीत नहीं। अगस्त :एनएसए बातचीत से पहले पाक हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कश्मीरी अलगाववादियों को न्योता भेजकर 23 अगस्त को दावत पर बुलाया। 22 अगस्त (NSA बातचीत रद्द) :भारत-पाकिस्तान के बीच रविवार-सोमवार को होने वाली एनएसए लेवल की मीटिंग 4 दिन के सस्पेंस के बाद रद्द। सितंबर : बीएसएफ और पाक रेंजर्स के बीच दिल्ली में बातचीत। सितम्बर : एलओसी (पुंछ के चक दा बाग) पर हुई भारत और पाक की ब्रिगेड कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग। 29 सितंबर :US में PM मोदी-नवाज का आमना-सामना, दूर से हुई दुआ-सलाम, हाथ हिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। 30 सितंबर : UN आम सभा में पाकिस्तान के PM नवाज शरीफ ने की भारत साथ अमन की पहल, लेकिन रखीं 4 शर्ते... कश्मीर से सेना हटाई जाए। 1 अक्टूबर:यूएन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने PM नवाज को दिया था दोटूक जवाब, चार सूत्रों की जरूरत नहीं है। आतंकवाद छोड़िए और बैठकर कीजिए। अक्टूबर: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की स्पीच के बाद पाकिस्तान ने यूएन सेक्रेटरी जनरल बान की-मून को भारत के खिलाफ एक डोजियर सौंपे। 23 अक्टूबर:पाकिस्तान को अमेरिका में फटकार... भारत की शिकायत करने पर अमेरिका ने डांटा। 27 नवंबर :दो महीने में पाक का यू-टर्न: माल्टा में कॉमनवेल्थ देशों की समिट में PM नवाज शरीफ ने कहा- हम बिना शर्त भारत से बात करने को तैयार। 30 नवंबर : चौथी मुलाकात- जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान पेरिस में PM मोदी से नवाज शरीफ की मुलाकात। 6 दिसंबर (NSA बातचीत) :दोनों देशों के NSA बैंकाक में मिले, अजीत डोवाल और नसीर जांजुआ के बीच बात हुई। 8 दिसंबर (सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा):पाकिस्तान पहुंचीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा- रिश्ते बेहतर बनाने का पैगाम लेकर आई हूं। 25 दिसंबर: पांचवी मुलाकात- पीएम नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को अफगानिस्तान से लौटते वक्त अचानक पाकिस्तान पहुंचे। लाहौर में 2 घंटे 40 मिनट रुके। 2 जनवरी 2016:पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हमले में 9 सुरक्षा कर्मी शहीद। 15 जनवरी:सचिव लेवल की बातचीत 15 जनवरी को इस्लामाबाद में होनी थी। लेकिन पठानकोट अटैक के बाद रद्द हो गई। 17 मार्च:सार्क देशों के समिट के दौरान दोनों देशों के विदेश सचिव मिले। 26 अप्रैल:दोनों देशों के विदेश सचिवों में पठानकोट हमले के बाद पहली बार नई दिल्ली में औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। 4 अगस्त: पाकिस्तान में आतंकियों की धमकी और विरोध के बावजूद सार्क कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए गृहमंत्री राजनाथ सिंह। 24 अगस्त: सार्क के वित्त मंत्रियों की इस्लामाबाद में आयोजित मीटिंग में शामिल होने से वित्तमंत्री अरुण जेटली ने किया मना। 5 सितंबर: जी-20 शिखर सम्मेलन में  पीएम मोदी ने पाक पर किया तीखा हमला कहा दक्षिण एशिया में ‘एक अकेला देश’ ‘आतंक के एजेंट’ फैला रहा है। 

क्या है SAARC

- SAARC (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन) साउथ एशिया के 8 देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। - इसकी शुरुआत 8 दिसंबर, 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई थी। - इसके सदस्य राष्ट्र हैं भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान।

SAARC के खाते में सफलता से ज्यादा विफलताएं रहीं... - सार्क ने अब तक कुछ छोटे कदम उठाए हैं. लेकिन अब ज़रुरत है बड़े कदम उठाने की। - सार्क की स्थापना के 30 साल बाद इसे प्रतीकों से आगे बढ़ कर देखने की ज़रुरत है। - सार्क विश्वविद्यालय हो या सार्क सैटेलाइट, इसे इसकी वास्तविक उपलब्धि नहीं कह सकते। - दक्षिण एशिया में तरक्की की संभावनाएं अनेक हैं, चाहे कच्चा माल हो या कार्यकुशल श्रम, यहाँ सब कुछ मौजूद है। - सार्क की स्थापना के उद्देश्यों में एक था इस क्षेत्र को ग़ुरबत से उठा कर विकास के रास्ते पर लाना। - सार्क का मक़सद था क्षेत्र में एकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और आपसी व्यापार बढ़ाना. इसमे ख़ास सफलता नहीं मिली है। - इसके विपरीत 28 देशों के संघ यूरोपीय संघ एक कामयाब गुट है। - जहाँ एक देश का नागरिक दूसरे देश में बग़ैर पासपोर्ट के घूम सकता है, रह सकता है, नौकरी कर सकता है और संपत्ति खरीद सकता है।

SAARC में भारत की भूमिका... - सार्क देशों की संस्कृति और रीति रिवाज लगभग एक जैसे हैं - आपस में आम लोगों के बीच मतभेद भी अधिक नहीं हैं.लेकिन इसके बावजूद ये एक दूसरे से मीलों दूर हैं, - 2014 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था - 'सिंगापुर और दुबई जाना सार्क देशों में जाने के मुकाबले अधिक आसान और सस्ता है.' - PM मोदी ने इस दिशा में पहल भी की है. शपथ ग्रहण के दौरान सार्क देशों के नेताओं को न्योता दिया और सबसे पहले नेपाल, भूटान का दौरा किया. - काठमांडू में भारत सरकार की तरफ से सार्क व्यापारियों को तीन से पांच साल तक का वीज़ा देने की पेशकश भी ऐतिहासिक कदम था. - इसके अलावा दक्षेस सैटेलाइट परियोजना- दक्षेस उपग्रह के निर्माण और प्रक्षेपण का खर्च भारत वहन करेगा