10 साल बाद हुई इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक, देर से पहुंचे केजरीवाल

नई दिल्ली(16 जुलाई): पीएम मोदी ने आज इंटर स्टेट काउंसिल की बैटक की अध्यक्षता की। सभी केंद्रीय मंत्री और राज्यों के सीएम बैठक में मौजूद रहें। हालांकि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बैठक में देर से पहुंचे।आपको बता दें ये बैठक 10 साल बाद हो रही है। इससे पहले साल 2006 में ये बैठक हुई थी। तब केंद्र में यूपीए-1 की सरकार थी। 

पीएम ने एक ओर जहां बैठक के अजेंडा पर चर्चा की वहीं पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह की भी सराहना की। पीएम ने कहा कि राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है। बैठक में अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे धुर-विरोधी तो पहुंचे, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया नहीं शरीक हुए।

पीएम ने एनडीए के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा, '16 साल पहले इसी मंच से वाजपेयी ने कहा था, भारत जैसे बड़े और विविधता से भरे लोकतंत्र में वाद-विवाद, विवेचना और विचार विमर्श से ही ऐसी नीतियां बन सकती हैं, जो जमीनी सच्चाई को ध्यान रखती हैं। इंटर स्टेट काउंसिल ऐसा मंच है जिसका इस्तेमाल नीतियों को बनाने और उन्हें लागू करने में किया जा सकता है।'

राजनाथ की थपथपाई पीठ  मोदी ने इस दौरान अपने कैबिनेट सहयोगी राजनाथ सिंह के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, 'पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इसकी शुरुआत की थी। 2006 के बाद यह बैठक नहीं हो पाई। लंबे अंतराल तक यह बैठक नहीं हो सकी, लेकिन मुझे खुशी है श्रीमान राजनाथ सिंह ने इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया।'

राज्यों का सहयोग जरूरी प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए सिर्फ अपने दम पर किसी योजना को कामयाब करना संभव नहीं है। राज्यों के साथ वित्तीय सहयोग के साथ तालमेल भी जरूरी है। राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 42 फीसदी कर दी गई है। राज्य सरकारों के पास ज्यादा राशि आ रही है जिसे वह खर्च कर सकते हैं। 2015 में जो रकम मिली वह 2014 की तुलना में 21 फीसदी अधिक है। पंचायतों को 14 वें वित्तीय आयोग के तहत 2,78,000 करोड़ रुपए मिलेगा।

कैम्पा बिल पास होने की उम्मीद जताई प्रधानमंत्री ने कैम्पा बिल पास होने की भी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, 'बिल पिछली बार राज्यसभा से पास नहीं हो सका। उम्मीद है इस सत्र में पास हो जाएगा। जैसे ही बिल पारित होगा 40 हजार करोड़ की रकम राज्यों को बांटी जाएगी। सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने की वजह से जो रकम बच रही है उसे भी केंद्र सरकार राज्यों के साथ साझा करना चाहती है। आने वाले तीन सालों में सरकार का प्रयास पांच करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन देने का है।

कर्नाटक सरकार की तारीफ की  प्रधानमंत्री ने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा, 'हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर को कैरोसीन से मुक्त किया। केंद्र सरकार ने कहा है कि आज सब्सिडी में कैरोसीन के नाते जो खपत होती है अगर उसे बचाया जाएगा तो 75 फीसदी रकम राज्यों को दी जाएगी। कर्नाटक सरकार को इस पहल के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। अगर सभी राज्य 25 फीसदी भी खपत कम करें तो अनुमान के तौर पर 1600 करोड़ रुपया राज्यों को मिल सकता है।'

याद किया बाबा साहेब को, दी नसीहत प्रधानमंत्री ने बाबा साहेब आंबेडकर को भी याद करते हुए राज्यों को आलोचनाओं से बचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, 'बाबा साहेब ने लिखा था भारत जैसे देश में सामाजिक सुधार का मार्ग उतना ही मुश्किल है जितना स्वर्ग जाने का मार्ग। जब सामाजिक सुधार के बारे में सोचते हैं तो दोस्त कम और आलोचक ज्यादा मिलते हैं। आलोचना से बचते हुए हमें एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हुए बढ़ाना होगा।'

शिक्षा पर दिया जोर  प्रधानमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'भारत में इस वक्त 30 करोड़ से ज्यादा बच्चे स्कूल जाने की उम्र में है। अभी दुनिया को स्किल मैन पॉवर देने की हालत में हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 1965 में पर्यावरण को एक निवेश बताया था यह बातें आज भी शिक्षा के रूप में प्रासंगिक हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था से बच्चे कितना शिक्षित हो रहे हैं इसका उल्लेख करना चाहिए। बच्चों को शिक्षा के उद्देश्य समझाया जाए। पढ़ाई ऐसी होनी चाहिए जो बच्चों को जिज्ञासा जगाए। स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा था शिक्षा का मतलब है चरित्र निर्माण अपनी बौद्धिक शक्ति को बढ़ाना। हमें नौजवानों को आउट ऑफ द बॉक्स सोचें।'

आतंरिक सुरक्षा पर की चर्चा  प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, 'आज के अजेंडा में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा होनी है। कौन सी चुनौतियां है और इनसे कैसे निपट सकते हैं इस पर चर्चा करना है। जब तक इंटेलिजेंस शेयरिंग पर फोकस न हो और एजेंसियों में तालमेल न हो पुलिस आधुनिक सोच और तकनीक से लैस न हो हमें इसे लगातार बढ़ाते चलना है। अपना सामर्थ्य बढ़ाना है और अलर्ट रहना है।