दूसरी पारी में पीएम मोदी ने की पहली 'मन की बात', बोले- मैं आया नहीं हूं, आप मुझे लाए हैं

Mann Ki Baat

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (30 जून):  प्रचंड बहुमत में दोबारा सत्ता में वापसी के बाद आज पहली बार प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' की। उन्होंने लोकसभा चुनाव में मिले ऐतिहासिक जनादेश के लिए जनता का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लाखों शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत की वजह से यह संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि भारत में, 2019 के लोकसभा चुनाव में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिया। यह संख्या हमें बहुत सामान्य लग सकती है लेकिन अगर दुनिया के हिसाब से कहूं तो चीन को छोड़ दें तो दुनिया के कई देशों की आबादी से ज्यादा लोगों ने भारत में मतदान किया। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए कानून नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार हैं, लोकतंत्र हमारी संस्कृति है, लोकतंत्र हमारी विरासत है और उस विरासत को लेकर हम पले-बढे़ लोग हैं। आपाताकाल में हमने अनुभव किया था और इसीलिए देश अपने लिए नहीं एक पूरा चुनाव अपने हित के लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहुत कर चुका था। पारिवारिक माहौल में ‘मन की बात’, छोटी-छोटी, हल्की-फुल्की, समाज, जीवन में, जो बदलाव का कारण बनती है एक प्रकार से उसका ये सिलसिला, एक नये स्पिरिट को जन्म देता हुआ और एक प्रकार से नए भारत के स्पिरिट को सामर्थ्य देता हुआ ये सिलसिला आगे बढ़े। 'मन की बात' देश और समाज के लिए आईने की तरह है। ये हमें बताता है कि देशवासियों के भीतर अंदरूनी मजबूती, ताकत और टैलंट की कोई कमी नहीं है।

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मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पानी बचाने के लिए सभी देशवासियों से एकजुट होने की अपील की। पानी की महत्ता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'पानी पारस का रूप है। पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्म जगत, मीडिया, कथा-कीर्तन करने वाले लोग सभी अपने-अपने तरीके से पानी को बचाने के लिए अभियान चलाएं। प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के लिए लोगों से #JanShakti4JalShakti हैशटैग का उपयोग करते हुए अपने कॉन्टेंट को अपलोड करने का भी आह्वान किया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

 उन्होंने कहा कि जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे। मेरा पहला अनुरोध है– जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें। देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है। हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूं। इस दौरान पीएम मोदी ने जल संरक्षण को लेकर नागरिकों से तीन अनुरोध भी किए। पहला, स्वच्छता की तरह ही जल संरक्षण को भी जनांदोलन का रूप दें। दूसरा, ऐसे प्रयोगों का अध्ययन करें, जहां जलसंरक्षण का प्रयास करें। तीसरा, जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों की जानकारियों को साझा करें। पीएम मोदी ने जनशक्ति फॉर जलशक्ति हैशटैग चलाने की भी अपील की। 

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पीएम मोदी की बड़ी बातें...

- पानी की महत्ता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा- 'पानी पारस का रूप है। पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए हमे प्रयास करना चाहिए। फिल्म जगत, मीडिया, कथा-कीर्तन करने वाले लोग सभी अपने-अपने तरीके से पानी को बचाने के लिए अभियान चलाएं

- पीएम मोदी ने जल संरक्षण के लिए लोगों से #JanShakti4JalShakti हैशटैग का उपयोग करते हुए अपने कॉन्टेंट को अपलोड करने का आह्वान किया

- पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की

- 2019 का लोकसभा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लाखों शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत की वजह से यह संभव हो सका है

- भारत में, 2019 के लोकसभा चुनाव में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिया। यह संख्या हमें बहुत सामान्य लग सकती है लेकिन अगर दुनिया के हिसाब से कहूं तो चीन को छोड़ दें तो दुनिया के कई देशों की आबादी से ज्यादा लोगों ने भारत में मतदान किया

- भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए कानून नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार हैं, लोकतंत्र हमारी संस्कृति है, लोकतंत्र हमारी विरासत है और उस विरासत को लेकर हम पले-बढे़ लोग हैं। आपाताकाल में हमने अनुभव किया था और इसीलिए देश अपने लिए नहीं एक पूरा चुनाव अपने हित के लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहुत कर चुका था 

- 'मन की बात' देश और समाज के लिए आईने की तरह है। ये हमें बताता है कि देशवासियों के भीतर अंदरूनी मजबूती, ताकत और टैलंट की कोई कमी नहीं है।

पारिवारिक माहौल में ‘मन की बात’, छोटी-छोटी, हल्की-फुल्की, समाज, जीवन में, जो बदलाव का कारण बनती है एक प्रकार से उसका ये सिलसिला, एक नये स्पिरिट को जन्म देता हुआ और एक प्रकार से नए भारत के स्पिरिट को सामर्थ्य देता हुआ ये सिलसिला आगे बढ़े 

- आपातकाल में देश के हर नागरिक को लगने लगा था कि उसका कुछ छीन लिया गया था

- जब भारत में आपातकाल लगाया गया तो उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे में ही नहीं किया गया, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, आंदोलन में सिमट नहीं गया था बल्कि जन-जन के दिल में एक आक्रोश था। खोए हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी

- जब चुनाव से पहले मैंने कहा था कि चुनाव के बाद फिर 'मन की बात' में फिर मिलेंगे, तो लोग कहते थे मोदी को इतना भरोसा कैसे है? यह भरोसा मेरा नहीं आप लोगों का था। दरअसल, मैं वापस आया नहीं हूं बल्कि आप लोगों ने मुझे वापस लाया है

- मन की बात में चिट्ठियां और संदेश बहुत आते हैं लेकिन शिकायत बहुत कम आती है। देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं कितनी ऊंची हैं इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने के बाद भी लोग अपने लिए कुछ नहीं मांगते

- पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लोगों की सक्रिय भागीदारी के लिए उनका  धन्यवाद किया।

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प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम का ये 54 संस्करण है। इससे पहले पीएम मोदी अपने पहले कार्यकाल में आखिरी बार 24 फरवरी को उन्होंने मन की बात के जरिये देशवासियों के सामने अपनी बात रखी थी। यह मन की बात कार्यक्रम का 53वां संस्करण था। इसके बाद देश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते मार्च और अप्रैल में इसका प्रसारण नहीं हो सका था।  23 मई को घोषित नतीजों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद अपने दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी एकबार फिर से इस कार्यक्रम की शुरुआत की है।