आपातकाल पर पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला, बोले- सत्तासुख के लिए देश को जेलखाना बनाया

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (26 जून): आपातकाल के 43 साल पूरे होने पर बीजेपी देशभर में काला दिवस मना रही है। इसी के तहत पीएम मोदी ने मंगलवार को मुंबई में कार्यकर्ताओं के बीच आपातकाल को लेकर बात की। PM मोदी ने कहा कि हर साल इमरजेंसी को याद किया जाता है, देश के इतिहास के लिए ये एक काला दिन है। इसे सिर्फ कांग्रेस और उसकी सरकार का विरोध करने के लिए नहीं बनाया जाता है।

पीएम ने कहा कि जिसने पराधीनता के संघर्ष को नहीं देखा है उनके सामने आजादी की कितने भी बातें करें वह अनुभव नहीं कर सकता है। आज की पीढ़ी के नवजवानों से अगर पूछा जाए तो उन्हें ज्यादा पता नहीं होगा। उनके भीतर से आग प्रकट नहीं होगी। प्यासे को पता चलता है कि पानी नहीं है तो वह पल कैसा होता है। व्यक्ति को अभाव में अनुभव होता है। देश ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सत्ता सुख और परिवार हित के लिए लोग हिंदुस्तान को जेलखाना बना देंगे। देश के नेताओं को सलाखों में बंद कर देंगे।उन्होंने गायक किशोर कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें गाने-बजाने के लिए बुलाया, किशोर कुमार ने मना किया तो रेडियो पर से किशोर कुमार के गानों को हटा दिया गया। कांग्रेस पार्टी आंधी फिल्म से इतनी डर गई कि उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिस पार्टी के अंदर ही लोकतंत्र नहीं उससे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है।  

पीएम ने कहा कि कि हम इमरजेंसी को इसलिए याद करते हैं ताकि देशवासियों को बता सके खुद को भी इसका आभास कराते रहे। लोकतंत्र को सचेत रखने के लिए इमरजेंसी को याद करना जरूरी है। पीएम बोले कि आज की युवा पीढ़ी को इमरजेंसी का ज्ञान नहीं है उन्हें इसके बारे में बताना काफी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्यासे को पता नहीं है कि पानी कैसा होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान गणमान्य राजनेताओं को जेल में डाल दिया गया था। एक परिवार के लिए संविधान का दुरुपयोग किया गया, सत्ता सुख के लिए अपनी ही पार्टी को तबाह कर दिया गया। न्यायपालिका को भी डराया धमकाया गया। उन्होंने कहा कि जब-जब कांग्रेस पार्टी या एक परिवार को अपनी कुर्सी जाने का संकट महसूस हुआ है तो उन्होंने चिल्लाना शुरू किया है कि देश संकट से गुजर रहा है, देश में भय का माहौल है इससे देश को सिर्फ हम ही बचा सकते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि इनके लिए देश, परंपरा, लोकतंत्र कुछ भी मायने नहीं रखता है। जो लोग परिवार की सेवा कर रहे थे, उनके लिए पांचों उंगलियां घी में थीं। देश ने कभी सोचा नहीं था कि इन लोगों को कोर्ट में चार्ज हो सकता है, भ्रष्टाचार के मामले में जमानत पर छूटे हुए हैं। अब जब जमानत पर हैं तो सबसे बड़े जज को महाभियोग के नाम पर डरा दो कि नीचे का कोई जज आवाज नहीं ला सके।