पीएम मोदी से घबराया चीन, बदल डाले यह नियम...

नई दिल्ली (5 जनवरी): विश्व में भारत की बढ़ती ताकत से ड्रैगन भी घबरा गया है। उसे अब अपनी बादशाहत खत्म होती नजर आ रही है तो वहां की मीडिया ने अपनी सरकार को मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर फोकस करने की सलाह दी है।


चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में कहा, दक्षिण एशियाई देशों में एप्पल के संभावित सप्लाई चेन के आने से चीन पर दबाव बढ़ेगा। यह देखने वाली बात है कि भारत मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के तौर पर चीन की जगह ले पाएगा या नहीं। लेकिन जैसी नई स्थिति तैयार हो रही है उससे यह तो स्पष्ट है कि चीन को मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को बढ़ाना ही होगा।


चीन से भारत ने छीनी बादशाहत...

- दुनिया भर के निवेश (एफडीआई) को अपने देश में आकर्षित करने के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है।

- इसके चलते एफडीआई के मामले में चीन की बादशाहत छिन गई और भारत एफडीआई का नया सरताज बन बैठा।

- भारत ने 2015 में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे ज्‍यादा एफडीआई आकर्षित करने वाला देश बन गया था।

- इस दौरान जहां भारत ने 63 अरब डॉलर एफडीआई आ‍कर्षित किया था, वहीं चीन के हिस्‍से सिर्फ 56.6 अरब डॉलर ही एफडीआई आया।


पिछड़ने के बाद चीन ने बदले नियम...

- भारत से 2 साल से मात खाने के बाद अब चीन को एफडीआई को लेकर अपने नियमों को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

- चीन ने इसके चलते कुछ ऐसे सेक्‍टर को खोलने का फैसला किया है, जिन्‍हें अभी तक विदेशी निवेश के लिए नहीं खोला गया था।

- इसमें परिवहन और रेलवे जैसे सेक्‍टर भी शामिल हैं।

- चीन ने एफडीआई के लिए रिस्टिक्‍टेड सेगमेंट की संख्‍या को 93 से घटाकर अब 62 कर दिया है।