माणा में आने वाला व्यक्ति जान सकता है भविष्य, पीएम मोदी यहां मनाएंगे दिवाली

नई दिल्ली ( 29 अक्टूबर ) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल किसी सीमाई क्षेत्र में अपनी दिवाली मनाते हैं। पहली दिवाली पीएम मोदी ने सियाचीन में जवानों के साथ मनाई थी, उसके बाद दूसरी दिवाली उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ मनाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल उत्तराखंड में सुदूर सीमाई चौकियों में से एक चौकी पर तैनात आईटीबीपी कर्मियों के साथ दीवाली मनाएंगे।

पीएम मोदी इस बार की दिवाली जहां मनाने जा रहे हैं उस गांव की ये बात जानकर आप चौंक जाएंगे। पीएम मोदी ने इसे ऐसे ही नहीं चुना है। कहा जाता है कि गरीबी मिटानी है तो आप उत्तराखंड के इस गांव में आइए। मान्यता है कि इस गांव में जो भी आता है उसकी गरीबी दूर हो जाती है। पीएम मोदी भी इस बार दिवाली इसी गांव में आईटीबीपी के जवानों के साथ मनाने वाले हैं। 

प्रधानमंत्री के साथ दौरे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि डोवाल उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित एक गांव के रहने वाले हैं। 

यहीं नहीं इस गांव को श्रापमुक्त जगह का दर्जा प्राप्त है। जी हां इस गांव के बारे में ऐसी मान्यता है यहां आने वाला व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

पवित्र बदरीनाथ धाम से 3 किमी आगे जाने पर भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित इस गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा था। इस गांव में आने पर व्यक्ति स्वप्नद्रष्टा हो जाता है। जिसके बाद वह होने वाली घटनाओं के बारे में जान सकता है। माणा गांव उत्तराखंड में चमोली जिले में प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम से 3 किमी की दूरी पर स्थित है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री बदरीनाथ धाम में पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन भी करेंगे।

बताया जाता है कि माणिक शाह नाम एक व्यापारी था जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था। एक बार व्यापारिक यात्रा के दौरान लुटेरों ने उसका सिर काटकर कत्ल कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप कर रही थी। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया। इसके बाद माना गांव में मणिभद्र की पूजा की जाने लगी।  माणा का एक नाम मणिभद्रपुरी भी है।

भगवा‌न शिव ने माणिक शाह को वरदान दिया कि माणा आने पर व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाएगी। मान्यता तो यहां तक है कि बृहस्पतिवार को पैसे के लिए प्रार्थना की जाए तो अगले बृहस्पतिवार तक मिल जाता है। जनश्रुतियों की मानें तोइसी गांव में गणेश जी ने व्यास ‌ऋषि के कहने पर महाभारत की रचना की थी। यह जगह आज भी व्यास पोथी के नाम से जानी जाती है