सिंगापुर में पीएम मोदी ने रुपे कार्ड से खरीदी मधुबनी पेंटिंग, जानें इसका इतिहास

नई दिल्ली ( 2 जून ): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सिंगापुर में इंडियन हेरिटेज सेंटर के दौरे का किया। इस दौरान पीएम मोदी ने एक मधुबनी पेंटिंग खरीदी। इस पेंटिंग को रुपे कार्ड से पीएम ने खरीदा। हेरिटेज सेंटर पर पहुंचने पर मोदी का शानदार स्वागत किया गया। इस सेंटर में दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में भारतीय समुदाय की यात्रा की झलक देखने को मिलती है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘सिंगापुर और भारत को नजदीक लाने में इंडियन हेरिटेज सेंटर के सराहनीय प्रयास। रुपे कार्ड का इस्तेमाल कर मैंने बहुत बढ़िया मधुबनी पेंटिंग खरीदी।’ मधुबनी पेंटिंग (या मिथिला कला) भारत और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में प्रचलित हैं।मोदी ने गुरुवार को सिंगापुर में तीन भारतीय मोबाइल भुगतान ऐप भीम, रुपे और एसबीआई का शुभारंभ करते हुए कहा था कि इन ऐप का अंतरराष्ट्रीय शुभारंभ डिजिटल भारत को दिखाता है। सिंगापुर में स्थित इंडियन हेरिटेज सेंटर भारतीय-सिंगापुर लोगों की संस्कृति, विरासत और इतिहास को दिखाता है। इस सेंटर का उद्घाटन सात मई को किया गया।

जानें क्या है मधुबनी पेंटिंग...आधुनिक मधुबनी कला शैली का विकास 17 वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। यह शैली मुख्य रूप से जितवारपुर और रतन गांव में विकसित हुई। सदियों से मिथिला की औरतें अपने घरों, दरवाजों पर चित्र उकेरती रही हैं जिनमें एक पूरा संसार रचा जाता रहा है। कोहबर, दशावतार, अरिपन, बांसपर्री और अष्टदल कमल शादी के अवसर पर घरों में बनाए जाते रहे हैं। मिथिला पेंटिंग के विस्तार की कहानी दो त्रासदियों से जुड़ी है।साठ के दशक में ऑल इंडिया हैंडिक्राफ्ट बोर्ड ने मुंबई के कलाकार भाष्कर कुलकर्णी को मिथिला क्षेत्र में इस कला को परखने के लिए भेजा था। अकाल के दौरान कुलकर्णी ने इस क्षेत्र की महिलाओं को कागज पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया ताकि आमदनी के स्रोत के रूप में यह कला विकसित हो सके। यह प्रयोग व्यावसायिक रूप से कारगर साबित हुआ। आज मधुबनी कला शैली में कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं जिनका बाजार फैलता ही जा रहा है।

महासुंदरी देवी, गंगा देवी और सीता देवी जैसी सिद्ध कलाकारों ने मिथिला पेंटिंग को एक कला के रूप में देश-विदेश में प्रतिष्ठित किया लेकिन वर्तमान में यह पेंटिंग आर्ट से ज्यादा एक प्रोडक्ट बन गई है। मौलिक चित्रों की जगह नकल का बाजार गर्म है।इस चित्र में खासतौर पर कुल देवता का भी चित्रण होता है। हिन्दू देव-देवताओं की तस्वीर, प्राकृतिक नजारे जैसे- सूर्य व चंद्रमा, धार्मिक पेड़-पौधे जैसे- तुलसी और विवाह के दृश्य देखने को मिलेंगे। मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अरिपन या अल्पना।चटख रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे गहरा लाल रंग, हरा, नीला और काला। कुछ हल्के रंगों से भी चित्र में निखार लाया जाता है, जैसे- पीला, गुलाबी और नींबू रंग। इन रंगों को हल्दी, केले के पत्ते, लाल रंग के लिऐ पीपल की छाल का इस्तेमाल करके घर में ही बनाया जाता है। भित्ति चित्रों के अलावा अल्पना का भी बिहार में काफी चलन है।