पीएम मोदी ने पेश किया 4 साल का रिपोर्ट कार्ड, कहा- हमारी सरकार जनपथ से नहीं, जनमत से चल रही है

नई दिल्ली ( 26 मई ): केंद्र में एनडीए सरकार के चार साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के कटक में शनिवार को रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कटक की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरी सरकार के 4 साल पूरे होने के बाद भगवान जगन्नाथ की धरती से सवा अरब भारतीय को प्रणाम करने सौभाग्य हासिल हुआ है। उत्कल की धरती विशेष है। यहां का कण-कण कुछ करने का संकल्प देता है। यहां शुरू किया कोई भी अभियान विफल नहीं होता।  चार साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जमकर बखान किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने यूपीए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि हम जनपथ से नहीं बल्कि जनमत से सरकार चलाते हैं। कालेधन और भ्रष्टाचार पर अपनी सरकार की मुहिम पर उन्होंने कहा कि हमने JAM यानी जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए 80,000 करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए हैं।पीएम मोदी ने कहा कि यह सरकार कनफ्यूजन वाली नहीं बल्कि कमिटमेंट वाली सरकार है। मोदी ने कहा, 'कमिटमेंट वाली सरकार चलती है, तब देश का राजकोषीय घाटा कम करने का प्रयास सफल होता है। कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी सरकार जिस तरह लड़ाई लड़ रही है, उसने कैसे कट्टर दुश्मनों को भी दोस्त बना दिया है। यह जनता देख रही है।' पीएम मोदी ने कहा, '45,000 करोड़ से ज्यादा अघोषित आय का पता चला है। बेनामी संपत्ति लागू होने के बाद 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति को जब्त किया जा चुका है। पहले यह कल्पना थी कि बड़े लोगों को तो कुछ होता ही नहीं। लेकिन आज 4 पूर्व मुख्यमंत्री जेल के अंदर हैं।'पीएम मोदी ने कहा, '4 सालों ने देश के लोगों में यह भरोसा पैदा किया है कि स्थितियां बदल सकती हैं, हिंदुस्तान बदल सकता है। देश निराशा से आशा, सुशासन से कुशासन, कालेधन से जनधन की ओर तेज गति से बढ़ रहा है। कामाख्या, कन्याकुमारी, बलिया, बीदर, बाड़मेर तक यह सरकार सबका साथ सबका विकास के लए काम कर रही है। यह वह एनडीए सरकार है, जिसके लिए गरीबों का पसीना गंगा, यमुना, नर्मदा के जल की तरह पवित्र है।'पीएम ने अपनी सामान्य पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा, 'हम गरीबी झेल कर आए हैं, इसलिए हमारे लिए उनका कल्याण ही हमारे लिए प्रतिबद्धता है। यह ऐसी सरकार है, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का जीवन एक-एक पैसे की चिंता करते हुए बीता है। चांदी के चम्मच की कहावत को तो छोड़िए हमने तो बचपन ऐसे गुजारा है, जहां चम्मच तक नहीं देखा है।'