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पीएम मोदी 25 दिसंबर को देशवासियों को देंगे खास तोहफा

25 दिसंबर को क्रिसमस है और इस मौके पर दुनियाभर में तोहफे की खास रवायत है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों को ऐसा तोहफा देने जा रहे हैं जिसका लोगों को कई दशक से इंतजार था

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 दिसंबर): 25 दिसंबर को क्रिसमस है और इस मौके पर दुनियाभर में तोहफे की खास रवायत है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों को ऐसा तोहफा देने जा रहे हैं जिसका लोगों को कई दशक से इंतजार था। दरअसल क्रिसमस के मौके पर  25 दिसंबर को  प्रधानमंत्री मोदी उस पुल का उद्घाटन करने जा रहे हैं जिसकी आधारशिला 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी और निर्माण कार्य साल 2002 में तत्कालीन अटल सरकार ने शुरू किया था। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना ये पुल देश के सबसे लंबे रेल कम रोड ब्रिज है।

इस पुल के बन जाने से अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक पहुंचना आसान हो जाएगा। पूर्वोत्तर के राज्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस बोगीबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है। यह पुल नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित डिब्रूगढ़ जिले को अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगते धेमाजी जिले के सीलापथार को जोड़ता है। भारत और चीन के बीच लगभग चार किलोमीटर की सीमा लगती है। इस पुल से डिब्रूगढ़ और अरणाचल प्रदेश के बीच की 500 किलोमीटर की दूरी भी 100 किलोमीटर कम हो जाएगी।

इससे पहले 2 दिसंबर को भारत ने चीन से लगी सीमा रेखा के पास अपने सबसे लंबे सड़क और रेलवे पुल को खोल दिया है। रक्षा की दृष्टि से अहम इस पुल पर सोमवार से परिचालन शुरू हो गया है। असम के दिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को जोड़ने वाले इस ब्रिज को बोगीबील नाम से भी जाना जाता है। यह पुल भारत का सबसे लंबा रोड-सह-रेल पुल है। जो 4.94 किमी लम्बा है। रेलवे मंत्री पियुष गोयल ने ट्वीट किया कि यह पुल उत्तर-पूर्व में कनेक्टिविटी के दरवाजों को खोलता है।

इस पुल की बड़ी बातें...

- इस परियोजना को 1996 में मंजूरी दी गई थी। 2002 में अटल सरकार ने पुल का निर्माण शुरू करवाया था। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने 2007 में इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का नाम दिया  

- यह पुल एशिया का दूसरा सबसे लंबा पुल है। इस पुल के नीचे डबल रेल लाइन है वहीं पुल के उपर तीन लेन वाली सड़क है

- यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के स्तर से 32 मीटर ऊपर बना है। यह पुल स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले ब्रिज की तरह दिखता है

- यह पुल अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमारेखा के पास लॉजिस्टिक सुविधाओं को सुधारने के लिए भारत द्वारा चलाई जा रहीं नियोजित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का हिस्सा है

- अन्य परियोजनाओं में ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग का निर्माण और शक्तिशाली और सहायक नदियां जैसे दीबांग, लोहित, सुबानसिरी और कामेंग पर नई सड़क और रेल लिंक का निर्माण शामिल है

- अभी तक अरुणाचल के लिए रेल और सड़क परिवहन असम के तीन पुलों के माध्यम से होता आ रहा है। जिसमें बोंगाईगांव जिले में जोगिगोपा, गुवाहाटी के पास साराघाट और सोनियापुर और नागांव के बीच कोली-भोमोरा शामिल है

- इसके अलावा दूसरा मार्ग नौका मार्ग  है, लेकिन यह भारी माल के लिए सही नहीं है। वहीं मई-अक्टूबर के बीच छह महीने के लिए मानसून के कारण नौका सेवाओं पर भी असर  पड़ता है। जिसके कारण जल परिवहन में बाधा भी आती है

- सरकार के लिए यह ब्रिज पूर्वोत्तर में विकास का प्रतीक है और साथ ही तेजपुर से आपूर्ति प्राप्त करने के लिए चीन सीमा पर स्थित सशस्त्र बलों के रणनीतिक कदमों को सुलझाने के अहम रणनीति का हिस्सा भी है।

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