PM: बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना तो सिर्फ मनमोहन जी ही जानते हैं

नई दिल्ली (8 फरवरी): राज्यसभा में नोटबंदी पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि मनमोहन जी पिछले 35 साल से अर्थशास्त्री रहे, लेकिन इतने घोटाले हुए पर उनपर कोई दाग नहीं लगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना तो सिर्फ मनमोहन जी ही जानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जब मनमोहन सिंह के बारे में यह टिप्पणी की कि बाथरुम में रेनकोट पहनकर नहाने की कला सिर्फ मनमोहन सिंह जी को ही आती है, तो इसपर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।

पीएम के भाषण के मुख्य अंश...

- आदिवासियों के सशक्तिकरण के लिए वनबंधु कल्याण योजना के तहत सफल काम किया है।- हमारी सरकार ने दाल के उत्पादन को बढ़ावा दिया। इसबार 50 से 60 प्रतिशत उत्पादन बढ़ने की संभावना है।- कभी भी हार स्वीकार नहीं करना, ये कब तक चलेगा।- सरकार के प्रोक्योरमेंट प्रोसेस में पारदर्शिता लाने में हमने बड़ी सफलता पाई है।- सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए, उज्जवला योजना इसका ही एक नमूना है।- सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 1 करोड़ अकाउंट खुले हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत 55 लाख बच्चों को खोजकर टीका दिया गया।- गरीब महिलाओं को हम लगभग 1 करोड़ 65 लाख से ज्यादा गैस के कनेक्शन दिए गए और 5 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का प्रयास।- हमने अफसरों से असटेस्ट कराने की जगह सेल्फ अटेस्ट की व्यवस्था शुरु की।- हमने मॉनिटरिंग पालिसी में केंद्र सरकार का एक भी आदमी नहीं रखा है।- पूर्व सुब्बाराव ने अपनी किताब में लिखा है कि चिदबंरम ने लिक्विडिटी कमेटी बनाने पर मुझसे परामर्श भी नहीं किया।- रिजर्व बैंक की मर्यादा है और गवर्नर को विवादों में लाना शोभा नहीं देता।- डायरेक्ट बेनिफिट से हम करीब-करीब 50 हजार करोड़ रुपये बचा पाए हैं।- आज हमारे देश में 60-70 फीसदी तक लोग रेलवे टिकट की बुकिंग ऑनलाइन करते हैं कैसिंल करने पर पैसे भी ऑनलाइन ही वापस आते हैं।- स्वाभाविक है कि देश में कैशलेस का मतलब है कि धीरे-धीरे समाज को इस ओर ले जाना।

- जहां भी डिजिटल कनेक्टिविटी है वहां से ही शुरु करें हो सकता है, धीरे-धीरे ये दूर-सूदूर गांवों में भी पहुंच जाए। 

- लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतना बड़ा फैसला आमतौर पर नहीं लिया जाता इसलिए लोगों को समझने में वक्त लगेगा।- 1972 में कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता ज्योति बसु ने कहा था- इंदिरा गांधी जी की सरकार कालेधन से ही चल रही है।- मनमोहन सिंह जैसा कोई शायद ही अर्थशास्त्री होगा जिसका अर्थव्यवस्था पर इतने लंबे वक्त तक दबदबा रहा है।- ये हमारे लिए गर्व की बात है कि देश की जनता अपनी बुराईयों से लड़ने के लिए कष्ट सहने को भी तैयार है।- ये ऐसा मौका था जहां सरकार और जनता एक साथ थी।- दुनिया में इतना बड़ा निर्णय हुआ ही नहीं है इसलिए दुनिया के अर्थशास्त्रियों के लिए और कॉलेजों में नोटबंदी केस-स्टडी बन सकता है।- हमारे देश में सबसे ज्यादा माओवादियों ने बीते 3-4 महीनों में आत्मसमर्पण किया है।- गोड़बोले जी की किताब में जिक्र है कि इंदिरा गांधी जी के वक्त में वान्चू कमेटी ने नोटबंदी का सुझाव दिया था।- ज्यादातर जाली नोटों का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है कि ये बैंक तक ना पहुंचे, इसका इस्तेमाल आतंकियों-नक्सलियों को देने के लिए होता है।-  नोटबंदी कोई राजनीतिक कदम नहीं है ना ही किसी पार्टी को परेशान करने के लिए उठाया गया।

- पहली बार ऐसा हुआ कि जनता का मिजाज एक तरफ और नेताओं का मिजाज एक तरफ।- दुश्मन देश में जाली नोट का कारोबार करने वाले को आत्महत्या करनी पड़ी।- वांचू कमिटी ने जब नोटबंदी के लिए रिपोर्ट दी थी तब इतनी समस्याएं नहीं थीं।- श्रीमती इंद्रा जी के समय में कमिटी ने नोटबंदी के बारे में बताया था।- गरीब का हित छीन लिया जाता है और मध्यम वर्ग का शोषण होता है। हम कबतक इन समस्याओं को लेकर गुजारा करेंगे।- सरकार ने आते ही काले धन के खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए थे।- आनंद शर्मा जी तो यूएस की नई वीजा पॉलिसी का दोष भी हम पर ही डाल रहे हैं।