दो हजार के नोट छापने से हुई गलती, लोगों को हो रही दिक्कत

नई दिल्ली(4 दिसंबर): नोटबंदी के 24 दिन बाद भी देश में हर तरह कैश की किल्लत है। साथ ही जिस तरह से काफी कम मात्रा में नए नोट की सप्लाई हो रही है। उसे देखते हुए यह परेशानी अभी लंबी खिंच सकती है। परेशानी बढ़ने की प्रमुख वजह सरकार की आधी-अधूरी तैयारियों को बताया जा रहा है। ऐसी ही एक चूक 2000 के नोट छापने से हुई है।   बैंकर से लेकर आम आदमी परेशान   नोट की सप्लाई कम होने से अब बैंकर्स भी परेशान हो गए हैं। उन्होंने बकायादा फाइनेंस मिनिस्ट्री को चिट्ठी लिखकर कहा है, नोट की सप्लाई कम होने उन्हें आम आदमी के गुस्से का सामना करना पड़ रह है। ऐसे में आरबीआई बताए कि नोट क्यों कम छप रहे हैं और... अभी सिस्टम में कितने हैं।

ये हुई चूक

आरबीआई और सरकार ने सबसे बड़ी गलती यह कि उसने सबसे पहले 2000 रुपए के नोट छापने शुरु कर दिए। इसकी वजह से डिमांड की तुलना में करंसी सप्लाई नहीं हो पाई है। वहीं सरकार और आरबीआई का शुरूआत में 500 रुपए के नोट छापने पर नहीं हो पाया। जिसकी वजह से जिन लोगों को 2000 रुपए के नोट मिले भी, वह एक्सचेंज के लिए बेकार रहे। 

जल्द सप्लाई बढ़ाने की थी प्लानिंग  

आरबीआई औऱ सरकार ने 2000 के नोट पहले छापने का फैसला प्रमुख रुप से सप्लाई और ज्यादा करंसी वैल्यू को सिस्टम में पहुंचाना था। आरबीआई के अनुसार नोटबंदी के पहले देश में 500 और 1000 के करीब 2300 करोड़ नोट थे। इसमें 1000 के नोट 800 करोड़ और 500 के करीब 1500 करोड़ नोट सर्कुलेशन में थे। जिनकी वैल्यू 15 लाख करोड़ रुपए थी। सरकार ज्यादा वैल्यू वाली करंसी के रुप में 2000 का नोट छापकर कम प्रिटिंग में ज्यादा वैल्यू वाले नोट छापना चाह रही थी।