महागौरी की पूजा से होता है पितृ दोषों का नाश

नई दिल्ली (9 अक्टूबर): मां महागौरी की साधना का संबंध छाया ग्रह राहू से है। कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में राहू ग्रह का संबंध छठे सातवें और अष्टम भाव से लिया जाता है हालांकि राहू ग्रह की किसी भी भाव और राशि पर आधिपत्य नहीं रखता अतः मां महागौरी की साधना का संबंध शत्रुनाश, रोगनाश, वैवाहिक जीवन, विवाह में आ रही बाधा, भोगोलिक सुख, ग्रहस्थी सुख, आयु, ऐश्वर्य और विलासिता से है।

जिन व्यक्तियों कि कुण्डली में राहू ग्रह नीच, अथवा शनि से युति कर पितृ दोष बना हो रहा है अथवा राहू मीन अथवा धनु राशि में आकर नीच एवं पीड़ित है उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां महागौरी की साधना। मां महागौरी कि साधना से व्यक्ति को अकस्मात लाभ की प्राप्ति होती है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, व्यक्ति दीर्घायु बनता है, रोग और शत्रु नाश होता है, शारीरिक और भौगोलिक सुखो में वृद्धि होती है।  शेयर मार्केट ट्रेडर, स्क्रैप, कंप्यूटर इंजीनियर्स, पुलिस अथवा आर्मी और सिक्योरिटी सर्विस में काम करने वाले अगर मां महागौरी की आराधना करें तो अच्छा फल मिलता है।