यहां घर-घर में बनते हैं हथियार, जाने से डरती है पुलिस

ग्वालियर (13 जुलाई): क्राइम को कम करने के लिए लोगों में पुलिस का डर भी जरूरी है, लेकिन चंबल के बीहड़ में बसे कई ऐसे गांव भी हैं जहां पर जाने से पुलिस भी डरती है। यहां पर हाथों से की करामात से कंट्री मेड पिस्टल घर-घर में तैयार की जाती है। यहां कंट्री मेड पिस्टल ही नहीं, बल्कि 9 एमएम की पिस्टल से लेकर 12 बोर की बंदूकें भी तैयार हो रही हैं।

यहां बनाते हैं हथियार: -खासतौर से भिंड के माढ़हन गांव, जहां पर कई दशकों से देशी हथियार बनाने का काम हो रहा है। बदमाशों का खौफ इतना है, कि पुलिस आजतक गांव में छापा तक नहीं मार पाई है। -यहां पर हथियार बनाने वाले इतने पारंगत हैं कि वे न केवल देशी कट्टे, बल्कि 9 एमएम की पिस्टल तक बना लेते हैं।

लाखों कीमत वाले हथियार चंद हजार में मिलते हैं: -एक पिस्टल या बंदूक की कीमत 50 हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए तक होती है, जबकि देशी हथियार चंद हजार रुपए में मिल जाते हैं। -9 इंच बैरल वाला देशी कट्टा मात्र 1500 रुपए से लेकर 4000 रुपए कीमत में मिल जाती है। राइफल से छोटा 18 इंच बैरल वाला हथियार, जिसे पौनी तमंचा कहा जाता है, पांच हजार रुपए में उपलब्ध है।