सैकड़ों पायलट्स के दीमाग में अक्सर आता है आत्महत्या का विचार

नई दिल्ली (20 दिसंबर): कमर्शल फ्लाइट्स के सैकड़ों पायलट क्लिनिकली डिप्रेस्ड हैं। इससे भी सीरियस बात यह है कि डिप्रेशन के लक्षण होते हुए भी वे अपना इलाज नहीं करवाते हैं। हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर्स ने यह दावा किया है। इसकी रिपोर्ट ‘द जर्नल एनवायरनमेंटल' ने पब्लिश की है। इसके मुताबिक 4.1 प्रतिशत पायलटों के दिमाग में एक पखवाड़े में कम से कम एक बार आत्महत्या का विचार जरूर आता है। साथ ही 12.2 प्रतिशत पायलट्स में डिप्रेशन के लक्षण नोटिस किए गए।

करीब डेढ़ साल पहले डिप्रेशन की वजह से एक को-पायलट ने जर्मनविंग्स एयरलाइन की फ्लाइट जानबूझ कर फ्रेंच आल्प्स की चोटियों में क्रैश करा दिया था। इस हादसे मे 150 लोगों की मौत हुई थी। प्रोफेसर जोसेफ एलन की टीम ने इसी हादसे के बाद पायलट्स की दिमागी हालत का सर्वे करने का फैसला किया। 3 रिसर्चर्स की टीम ने अप्रैल से दिसंबर 2015 के बीच ऑनलाइन सर्वे किया। उसने 3500 पायलट्स से संपर्क किया।

पायलट्स को जवाब देने में हिचकिचाहट न हो,यह सोचकर उनके नाम नहीं पूछे गए। सर्वे में अलग-अलग टॉपिक रखे गए थे। सभी से नॉर्मल और मेंटल हेल्थ से जुड़े सवाल किए गए। नॉर्मल सवालों के जवाब सभी ने दिए। लेकिन मेंटल हेल्थ से जुड़े सवालों के जवाब सिर्फ 1848 पायलट्स ने दिए। इनमें कुछ ऐसे सवाल थे जो अमूमन डॉक्टर से डिप्रेशन के लक्षणों से संबंधित सवाल पूछते हैं।