वो ख़ौफ़नाक लम्हे: विमान उड़ रहा हो, ऐसा हो जाए और आपको पता भी नहीं चले

नई दिल्ली (13 मई) :  एक पायलट को कॉमर्शियल उड़ान से पहले गहन ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद उड़ान भरते समय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लम्हे के बारे में सोचकर देखिए कि उड़ान के दौरान पायलट बेहोश हो जाए या कॉकपिट में टॉक्सिक धुआं भर जाए। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक रीडिट पर प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान यूज़र्स ने पायलटों से उनके ख़ौफनाक़ अनुभवों पर सवाल किए जिनके बारे में विमान के यात्रियों को भी पता नहीं चला हो।  जानिए पायलटों की ज़ुबानी, कुछ ख़ौफ़नाक लम्हों की कहानी।

उड़ते वक्त विमान की इलैक्ट्रिक पावर ठप

एक एयरबस 320 के पायलट ने बताया कि एक बार एयरक्राफ्ट की अचानक पूरी इलैक्ट्रिक पावर फेल हो गई थी। उस वक्त विमान 23,000 फीट की ऊंचाई पर था। इमरजेंसी लाइटिंग, स्टैंडबाई इस्ट्रूमेंट्स और सभी स्क्रीन अंधेरे में डूब गए थे। ऐसा इसके बावजूद हुआ था कि विमान में तीन बैकअप जेनेरेटर थे। पायलट ने आपबीती को इस तरह बताया कि सोच कर देखिए कि आप किसी हाईवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कार को दौड़ा रहे हों और आपके सारे शीशे अचानक काले पर्दे से ढक जाएं। स्पीडोमीटर और सारे इलेक्ट्रिक सिस्टम्स अंधेरे में हों। ना ब्रेक और ना एक्सेलेरेटर से कोई रिस्पॉन्स मिल रहा हो। लेकिन आपकी कार फिर भी दौड़े जा रही हो। वो ठीक ऐसा ही अनुभव था।

विमान के कॉकपिट में ज़हरीला धुआं

'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक कॉकपिट में टॉक्सिक फ्यूम्स (धुआं) की स्थिति में पायलट्स को उल्टी और चक्कर आने जैसा महसूस होता है। इससे वो को-पायलट्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से सही तरह से बात भी नहीं कर सकते। कुछ पायलटों को ऑक्सीजन सप्लाई का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इस बारे में विमान के यात्रियों को कभी नहीं बताया जाता।

पायलट का बेहोश होना

फ्लाइट टैक्नीक्स इतनी एडवांस है कि हवा का दबाव एयरक्राफ्ट के लिए चुनौती नही होता। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि यात्रियों और पायलट के घायल होने का बिल्कुल ख़तरा नहीं होता। एक बार 12 वर्ष के अनुभव वाले एक पायलट को को-पायलट की बाजू पर बेहोश पाया गया था। गनीमत रही कि को-पायलट ने सब कुछ ठीक तरह संभाल लिया। थोड़ी देर बाद पायलट की चेतना वापस आ गई। लेकिन इस बीच विमान के यात्रियों को कुछ नहीं बताया गया।

ज्वालामुखी की राख

किसी ज्वालामुखी के फटने से निकलने वाली राख भी एयरक्राफ्ट के लिए बड़ी चुनौती होती है। हालांकि यात्रियों को पता रहता है कि वो ज्वालामुखी की राख वाले हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे हैं लेकिन उन्हें ये नहीं मालूम होता कि ये कितना ख़तरनाक हो सकता है। ज्वालामुखी की राख में चट्टान और कांच के टुकड़े होते हैं। जेट इंजन इतना गर्म होते हैं कि वो कांच को पिघला दें। लेकिन एक बार इंजन के अंदर आने पर ये फिर दोबारा ठोस आकार लेते हैं तो ये कम्प्रेसर के पंखों को जाम कर सकते हैं जिससे हवा का प्रवाह रुक सकता है। इससे इंजन बंद भी हो सकते हैं। ज्वालामुखी की राख में इलेक्ट्रोस्टेटिक चार्ज भी होता है ये एयरक्राफ्ट में इलेक्ट्रिक फेल्योर का कारण बन सकता है।

 कॉकपिट की खिड़की का फ्रेम से गिर जाना

एक रिडिट यूज़र ने बताया कि एक बार कॉकपिट से पूरी खिड़की ही फ्रेम से निकल गई। गनीमत रही कि ये हादसा विमान के लैंड करने के बाद हुआ।

उड़ान के दौरान विमान में बम रखा होने की धमकी

एक पायलट ने दावा किया कि समुद्र के लंबे स्ट्रैच के ऊपर उड़ान भरते समय बम की धमकी मिली थी। लेकिन उस समय वो जो कर सकता था वो यही था कि इंतज़ार करे और उम्मीद करे कि कुछ अनिष्ट ना हो। किसी भी यात्री को इसका पता नहीं लगा था।  

हवा में उड़ते वक्त विमानों के टकराने का ख़तरा

कई बार आपने वायुसेना के विमानों को आसमान में ज्वाइंट एक्सरसाइज करते देखा होगा। जिसमें विमान बहुत आसपास उड़ते हैं। ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल का अनुमान गलत होने की वजह से विमान हवा में आपस में टकराते टकराते बचे। ऐसे में पायलट की सूझबूझ ही काम करती है। ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं जब रनवे पर भी विमान उड़ान से पहले दौड़ते हुए आपस में टकराने से बचे।

मूसलाधार बारिश से दिखाई देना बंद होना

एक पायलट के मुताबिक रनवे पर तीन मील दौड़ने के बाद अचानक सामने से मूसलाधार बारिश होने लगी। उस वक्त विंडशील्ड के बाहर कुछ भी देखना असंभव हो गया। 500 फीट ऊपर जाने के बाद ही दोबारा दिखना शुरू हुआ।