दुनिया का सबसे देशभक्त नेता... जिसने अपने देश के लिए लिया 'मौत से अपॉइनमेंट'

Ninoy Aquino

प्रखर श्रीवास्तव, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 अगस्त): हमारे नेता वतन के लिए जान देने की बात तो करते हैं, लेकिन क्या आपको लगता है कि वक़्त आने पर ये ऐसा कर पाएंगे? क्योकि हमारे नेता निनॉय एक्विनो नहीं हैं... निनॉय एक ऐसे नेता थे जिन्हे अपनी मौत की तारीख... वक्त और जगह पहले से पता थी। वो तारीख थी 21 अगस्त 1983। निनॉय अपने कातिलों को पहले से जानते थे, वो अपनी मौत टाल सकते थे। लेकिन उन्होने शहादत का रास्ता चुना, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो अपने देश को एक तानाशाह की गुलामी से मुक्त करवाना चाहते थे। उन्होने खुद मौत से "अपॉइनमेंट" लिया था और मरने से पहले उन्होने अपना आखिरी इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार से कहा था कि "तुम अपने कैमरे चालू रखना, मुझे पता है सब बहुत तेज़ी से होगा, तीन-चार मिनट में सब खत्म हो जाएगा”... ये कहकर निनॉय हंसने लगे। निनॉय ने जो कहा था वही हुआ, उन्हे गोलियों से छलनी कर दिया गया और उस वक्त चालू था उस पत्रकार का कैमरा जिसमें कैद हो गई दुनिया के इतिहास की सबसे महान शहादत, ऐसी शहादत जिसे इस दुनिया में कभी नहीं भुलाया जा सकता। निनॉय ने अपनी मौत से पहले कहा था - “इंसान को मौका आने पर बेमतलब की ज़िंदगी को चुनने की बजाय सार्थक मौत को चुनना चाहिए”...

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एक था तानाशाह और एक था क्रांतिकारी

वो 70 का दशक था। फिलीपींस में तानाशाह फर्डिनांड मार्कोस की जालिम हुकूमत चलती थी। मार्कोस की क्रूरता को चुनौती देने वाला कोई नहीं था सिवाय निनॉय एक्विनो को छोड़कर। निनॉय तब एक युवा नेता था और नये नये सांसद बने थे। राजनीति में कदम रखते ही उन्होने तानाशाह मार्कोस के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर दी। निनॉय से जालिम मार्कोस इतना घबरा गया कि उसने 1972 में फिलीपींस में मार्शल लॉ लगा दिया और उसी रात निनॉय को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में निनॉय पर हर तरह के जुल्म ढहाए गए नतीजा ये हुआ कि उनका वजन 57 किलो से घटकर महज 36 किलो रह गया। 1980 में जेल के अंदर निनॉय को हार्टअटैक पड़ा, पूरे फिलीपींस में निनॉय के लिए सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ी। इसी दवाब में तानाशाह मार्कोस ने निनॉय को इलाज करवाने के लिए अमेरिका जाने की इजाजत दे दी। लेकिन इसके लिए ये शर्त रखी गई कि वो अमेरिका जाकर तानाशाह मार्कोस के बारे में कोई भी बयान नहीं देंगे। 

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निनॉय इलाज के लिए अमेरिका तो गए लेकिन उन्होने शर्त पूरी नहीं की। अगले 3 साल तक वो अमेरिका में रहकर पूरी दुनिया को मार्कोस के जुल्मो-सितम से रूबरू करवाते रहे। लेकिन निनॉय जानते थे कि अमेरिका में रहकर वो मार्कोस को सत्ता से नहीं उखाड़ सकते लिहाजा उन्होने वापस फिलीपींस लौटने का फैसला किया। निनॉय के करीबियों के पास ये पक्की ख़बर थी कि फिलीपींस की राजधानी मनीला में कदम रखते ही मार्कोस ने निनॉय की मौत का इंतज़ाम कर लिया है, उन्होने निनॉय को अगाह भी किया, लेकिन जो पीछे हट जाए वो फिर निनॉय एक्विनो कैसा?

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निनॉय ने मौत से अपॉइनमेंट फिक्स किया !

अमेरिका में 3 साल तक निर्वासित जीवन जीने के बाद निनॉय ने 21 अगस्त 1983 में फिलिपीन्स लौटने का फैसला किया। जब वो मनीला के लिए फ्लाइट में सवार हो रहे थे तो उन्हे इस बात की जानकारी मिल गई थी कि मनीला पहुंचते ही उन्हे मौत के घाट उतार दिया जाएगा। जब एक पत्रकार ने उनसे ये सवाल पूछा तो उन्होने कहा – “फिलिपीन्स के लिए अपनी जान देना मेरे लिए बेशकीमती होगा”... जाने माने पत्रकार जिम लॉरी को इंटरव्यू देते हुए निनॉय ने कहा... “हो सकता है मैं आपसे आखिरी बार बात कर रहा हूं, लेकिन जब विमान उतरे तो अपने कैमरे चालू रखना, मुझे पता है सब बहुत तेज़ी से होगा, तीन-चार मिनट में सब खत्म हो जाएगा”... निनॉय अब विमान में थे, कैमरे चल रहे थे और वो मुस्कुरा रहे थे, हंस रहे थे, अलग-अलग पत्रकारों को इंटरव्यू दे रहे थे। उनके इस अंदाज पर फिदा होकर कुछ महिला यात्रियों ने उन्हें kiss कर लिया। तब हंसते हुए निनॉय ने कहा "मेरी पत्नी बाद में ये देखेगी तो उसे बुरा लगेगा"। कुछ घंटों बाद विमान जैसे ही मनीला एयरपोर्ट पर उतरा तानाशाह मार्कोस के सैनिक धड़धड़ाते हुए प्लेन में दाखिल हो गए। उन्होंने निनॉय की गिरफ्तारी का नाटक किया। सफेद कपड़े पहने हुए निनॉय मुस्कुराते हुए उनके साथ चल दिए। उनकी इस मुस्कुराहट को देखकर किसी को इस बात का अंदाजा नहीं हो सकता था कि इस शख्स को ये मालूम है कि अगले 60 सेकेंड में उसे दर्दनाक मौत दे दी जाएगी।

 

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किसी को पता हो या ना हो, निनॉय जानते थे उनका अंजाम क्या होने वाला है। ना कोई डर, ना कई चिंता... पत्रकार जिम लॉरी का कैमरा चालू था। निनॉय जैसे ही प्लेन से नीचे उतरे, गोलियों की तड़तड़ाहट से मनीला एयरपोर्ट गूंज उठा। प्लेन से जब पत्रकारों ने नीचे झांका तो गोलियों से छलनी निनॉय का बेजान शरीर जमीन पर पड़ा था। सेना के जवान आए उन्होने उनकी लाश को उठाया और ट्रक में लाद कर ले गए। विमान में जो कैमरे थे उनमें साफ साफ कुछ भी कैद नहीं हुआ था लेकिन नीचे एक कैमरा था जिसमें कैद हो गया इस महान नेता की शहादत का हर लम्हा। 

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अक्विनो को जब गिरफ्तार करके नीचे लाया जा रहा था तभी एक हत्यारा दौड़ता हुआ आया और उसने निनॉय के सर पर गोली मारी दी। गोली लगते ही निनॉय नीचे गिर गए और मार्कोस के सैनिकों ने कातिल को भी वही मौत के घाट उतार दिया ताकि कोई सबूत न बचे। जैसा निनॉय ने पत्रकार जिम लॉरी को कहा था ठीक वैसा ही हुआ। साढ़े तीन मिनट में सब खत्म हो गया।

Ninoy Aquino    

निनॉय के खून का हर कतरा क्रांति बन गया

निनॉय के सामने मरने से इंकार कर देने का भी रास्ता था लेकिन उन्होने अपने देश के लिए मरने से नहीं बल्कि जीने से इनकार कर दिया। क्योंकि वो जानते थे कि उनका बेजान शरीर तानाशाह मार्कोस के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा। हुआ भी वही निनॉय की अंतिम यात्रा में 30 लाख से ज्यादा लोग जमा हुए, ये एक तानाशाह के खिलाफ आंसुओं से भरी बगावत थी। 

पूरा फिलीपिन्स, पूरी दूनिया जानती थी कि निनॉय की मौत के पीछे तानाशाह मार्कोस और उनकी अय्य़ाश पत्नी इमेल्डा का हाथ है। यहां से क्रांति की ऐसी आग फैली कि महज 30 महीने के अंदर 20 साल पुरानी मार्कोस की तानाशाही ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। 1986 में निनॉय की विधवा कोरी एक्विनो फिलीपींस की राष्ट्रपति बनीं और तानाशाह मार्कोस अपनी पत्नी इमेल्डा के साथ हमेशा-हमेशा के लिए फिलीपींस छोड़ कर भाग गया। दुनिया के सबसे देशभक्त नेता निनॉय कभी सत्ता में नहीं रहे लेकिन फिलिपीन्स के लोग आज भी उनके बारे में कहते हैं – “निनॉय एक ऐसे महान राष्ट्रपति हैं, जो हमें कभी नहीं मिले”।  

(Image Credit: Google)

निनॉय की हत्या और आखिरी इंटरव्यू का वीडियो...