एक बूंद खून बहाए बिना चीन का फिलीपींस पर कब्जा, फिलीपींस ने अमेरिका को कहा गुड बॉय

बीजिंग (20 अक्टूबर): चीनी राष्ट्राध्यक्ष शी चिन फिंग के निमंत्रण पर फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने 18 अक्टूबर की शाम बीजिंग पहुंचकर चीन की चार दिवसीय यात्रा शुरू की। इसी के साथ इतिहास के पन्नों में चीन ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो पहले कभी नहीं हुआ। जानकारों की मानें तो चीन ने खून की एक बूंद बहाए बिना ही फिलीपींस पर कब्जा जमा लिया।

जानकारों की मानें तो फिलीपींस के रिश्‍ते इस समय अमेरिका से अच्छे नहीं है और साउथ चाइना सी पर चीन की दबंगई के बाद उसे दोनों तरफ से नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में फिलीपींस ने अमेरिका को गुड बॉय कहते हुए चीन की तरफ जाना ही सही समझा। फिलीपींस का अमेरिका को छोड़कर चीन के पाले में जाना यूएस की नीति के लिए भी एक बड़ा खतरा बताया जा रहा है।

चीन पहुंचे फिलीपींस राष्‍ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ‍ मिलकर संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर आपसी विवादों को दूर करने की जरूरत है और इसके लिए बातचीत के तरीकों को अपनाया जाना चाहिए।

वहीं इससे पहले फिलीपींस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो दुतेर्ते ने कहा था कि वह अमेरिका के साथ संबंध समाप्त कर देंगे। दुर्तेते ने कहा, 'मैं अपनी विदेश नीति में बदलाव करूंगा। हम सही समय पर अमेरिका के साथ संबंध समाप्त कर देंगे और इसके बजाए रूस या चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाएंगे।'

दोनों देशों में South China Sea को लेकर था विवाद: South China Sea पर हेग स्थित अंतरराष्‍ट्रीय अदालत (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) ने इस मामले पर चीन के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट का कहना था कि इस इलाके पर चीन का कोई एतिहासिक हक नहीं है। चीन South China Sea के करीब 90 फीसदी हिस्‍से पर अपना दावा ठोंकता है। जिसको लेकर फिलीपींस ने चीन के खिलाफ इंटरनेशन कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।

ये है फिलिपिंस की मांग: इंटरनेशनल कोर्ट यूएन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के आधार पर फैसला सुनाएगा। 1982 में बने यूएनसीएलओएस के मुताबिक कोई भी देश अपनी टेरिटोरियल सोवेरिनटी बरकरार रखते हुए समुद्री सीमा के अंदर एक्टिविटी कर सकता है। यूएनसीएलओएस के मुताबिक, आईलैंड में 12 नॉटिकल माइल की रेडियस में कोई भी देश अपनी एक्टिविटीज रख सकता है। फिलीपींस ने सुनवाई में कहा था कि एक्स्ट्रा 200 नॉटिकल माइल तक फिशिंग या दूसरी गतिविधियों की परमीशन दी जानी चाहिए।

क्यों है इस क्षेत्र को लेकर विवाद: चीन दक्षिण चीन सागर में 12 समुद्री मील इलाके पर हक जताता है। इस इलाके को 12 नॉटिकल मील टेरिटोरियल लिमिट कहते हैं। ये इलाका दक्षिण चीन सागर में बने आर्टिफिशियल आईसलैंड के आसपास का ही है। चीन के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश (ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया) भी इस इलाके पर अपना दावा जताते हैं। पिछले महीने बराक ओबामा के साथ मीटिंग में शी जिनपिंग ने कहा था कि वे इस इलाके में मिलिट्री तैनात नहीं करना चाहते। हालांकि, अमरीका को लगता है कि चीन यहां मिलिट्री एक्टिविटीज बढ़ा रहा है। इसलिए वह इस इलाके में आवाजाही कर रहा है।

विवाद की वजह: साउथ चाइना सी में तेल और गैस के कई बड़े भंडार दबे हुए हैं। अमरीका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है। चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आईसलैंड में बदल दिया था।