आने वाले हैं 'महंगे' दिन, कच्चे तेल में आए उछाल से पेट्रोल-डीजल महंगा होना तय

संजीव त्रिवेदी, मनीष कुमार नई दिल्ली (26 मई): आज मोदी सरकार को दो साल पूरे हो गए। और अब कहा जा रहा है कि सस्ते दिनों के दो साल का वक्त भी पूरा हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि अब महंगे दिन आने वाले हैं। इसके पीछे ठोस वजह है। अब संभव है कि सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होगी। क्योंकि जिस कच्चे तेल के दामों में गिरावट को मोदी अब तक अपना नसीब बता रहे थे वही कच्चा तेल अब जनता के लिए महंगाई की बदनसीबी ला सकता है।     जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम औंधे मुंह गिर रहे थे। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के मैदान से इसे अपना नसीब बताकर जनता के सामने महंगाई से मुक्ति का ढोल पीट रहे थे। और अब मोदी राज के दो साल पूरे होने पर जब खुद मोदी और उनके मंत्री मोदी राज का जश्न मना रहे हैं। तब कच्चे तेल के दाम ने ही ऐसा सिरदर्द शुरू किया, जिसका असर जल्द आपकी जेब तक पहुंचने वाला है। 

7 महीने में पहली बार कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर के पार चली गई है। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से अब पेट्रोल-ड़ीजल महंगा हो सकता है। और ऐसे में जब पेट्रोल डीजल महंगा हुआ तो समझिए आपकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। कैसे अब ये समझ लीजिए। 

तेल महंगा होते ही दूध, सब्जी, राशन का सामान महंगा होगा। तेल महंगा होगा तो सफर, इलाज, घर बनाना तक महंगा हो जाएगा। क्योंकि तेल महंगा होने से इन सारी चीजों को ट्रांसपोर्ट करना महंगा होगा। तो सवाल उठता है आखिरकार अब मोदी सरकार क्या करेगी ?  आम लोगों पर भार डालेगी या जो एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया उसमें कमी करेगी। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल के दामों में उछाल आई तो पेट्रोल डीजल महंगा होगा जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।

पिछले दो साल में कच्चे तेल की कीमतें जब गिरी हुई थीं। तब आर्थिक मामलों के बड़े जानकारों ने खुलकर कहा था कि ये सरकार के लिए सबसे गोल्डन डेज़ हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि उस वक्त महंगाई पर कंट्रोल करने में सरकार इसीलिए कामयाब हो रही थी क्योंकि तेल सस्ता था। 

जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाला जो कच्चा तेल 110 डॉलर बैरल पर था जो घटकर 25 डॉलर प्रति बैरल तक आ पहुंचा। हालाकि सरकार ने इसका पूरा फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंचाया। उलट सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए पेट्रोल डीजल पर 9 दफा एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी कर दी। 9 बार में सरकार ने पेट्रोल पर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.30 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दिया। जिससे सरकार के खजाने में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपया पहुंचा। कहा जा रहा है कि अगर सरकार तब अपना खजाना नहीं भरती तो जनता को पेट्रोल 12 रुपये और डीजल 13 रुपये सस्ता मिल सकता था। 

मतलब सीधा सा ये समझ लीजिए कि दो साल में कच्चे तेल की कीमत गिरने से जितना फायदा आपको सरकार पहुंचा सकती थी, उसमें से आधा फायदा तो सरकार ने अपना खजाना भरने में उठा लिया। अब जब कच्चा तेल महंगा हुआ है तो महंगाई की फुल जिम्मेदारी उठाने के लिए आप तैयार रहिए। यानी अच्छे दिए बाय बाय, महंगे दिन आने वाले हैं। 

केयर रेटिंग के मुताबिक इस साल रुपया भी 68 से 69 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक जा सकता है। एक्सपर्ट कह रहे कि ऐसे में अगर कच्चे तेल के दामों में मजबूती बनी रही तो सरकार के पास पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ाने के सिवा और दूसरा चारा भी नहीं होगा। इस खबर ने सियासत को भी गर्म कर दिया है। विरोधी कह रहे हैं कि जब सस्ते कच्चे तेल का फायदा जनता को सरकार ने नहीं दिया तो महंगे क्रूड ऑयल का नुकसान जनता पर क्यों डाला जाए ? और सरकार इसके लिए राजी नहीं दिख रही।  

तेल के खेल में झटके खा चुकी कांग्रेस को पिछली यूपीए सरकार के वो दिन नहीं भूलते जब मनमोहन सरकार का सारा गणित अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की आसमान छूती कीमतों ने गड़बड़ा दिया था। मोदी सरकार के सत्ता संभलाते ही तेल की कीमतों में लगातार आई गिरावट ने इस झुंझलाहट को और बढ़ा दिया था। 

तेल की कीमतों में गिरावट और उछाल की टाइमिंग ने भारतीय राजनीति को अपने तरीके से खूब प्रभावित किया है क्योंकि इस टाइमिंग की सीधा रिश्ता महंगाई से है। कांग्रेस तेल के प्राइस पैटर्न के दुष्परिणामो का खुद को भुग्तभोगी मानती है। और अब जबकी तेल की कीमतों को लेकर NDA का कुशन पीरियड खत्म हो रहा है तो कांग्रेस तेल की कीमतों पर सियासत के लिए तैयार है।

कांग्रेस ने मोदी सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर उसकी विफलताओं की एक लंबी फेहरिस्त गिना दी। आरोप लगाया कि पिछले दो सालों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के घटने की वजह से सरकार को लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है जिसका फायदा सरकार ने आम लोगों के साथ साझा नहीं किया है। जिसे अब करना चाहिए, जब कच्चा तेल महंगा हो रहा है।

कांग्रेस तेल की महंगाई पर जनता के हित की बात उठाते हुए मोदी सरकार को इसलिए घेर रही है क्योंकि 2 साल में पेट्रोल 20 बार सस्ता हुआ, लेकिन सरकार की ड्यूटी से आपको फायदा सिर्फ 8.50 रुपए का मिला। कच्चा तेल डेढ़ साल में 59% सस्ता हो चुका है। पर पेट्रोल 16% और डीजल 20% ही सस्ता किया गया।

अब कच्चा तेल महंगा होना जैसे ही शुरु हुआ, सरकार ने भी अपना स्टैंड कड़ा कर लिया है। बीजेपी अभी से कहने लगी है कि तेल की कीमतों को काबू करने की जिम्मेदारी सिर्फ मोदी सरकार की नहीं है। राज्य भी महंगाई का बोझ संभालें। 

आम लोगों के लिए इस सियासी तकरार का सीधा सा आर्थिक मतलब ये है कि पेट्रोल-डीजल को लेकर आने वाले दिनो में आपकी जेब पर पड़ने वाले भार बढ़ सकता है। अगर 31 मई आधी रात को पेट्रोल पंपों पर आपको बढ़ी हुई दरें मिलती हैं तो ये भी मान कर चलिए कि थोड़ी महंगाई और बढ़ जाएगी।