सिर्फ GST में आने से ही सस्ता नहीं होगा पेट्रोल और डीजल: सुशील मोदी

नई दिल्ली (15 दिसंबर): आने वाले समय में पेट्रोल व डीजल वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में आ सकते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल पेट्रोलियम उत्पादों को इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में शामिल करने पर विचार करेगी। हालांकि महज जीएसटी के दायरे में आना पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की गारंटी नहीं होगी। बिहार के उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील मोदी की मानें तो अगर पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी में शामिल किए गए तो उन पर उच्चतम स्लैब से टैक्स लगेगा।

यही नहीं, राज्यों को भी पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने की छूट होगी। सुशील मोदी ने एक तरह से संकेत दे दिया है कि पेट्रोल-डीजल को नई कर व्यवस्था के दायरे में लाए जाने के बावजूद उनकी कीमतों में राहत की उम्मीद नहीं है। मोदी गुरुवार को उद्योग चैंबर फिक्की की सालाना आम बैठक को संबोधित कर रहे थे। सुशील ने कहा कि काउंसिल बिजली, स्टांप ड्यूटी और रियल एस्टेट को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करेगी। वह जीएसटी काउंसिल के सदस्य और जीएसटीएन पर बने राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष भी हैं।

बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन उत्पादों को संविधान में संशोधन किए बगैर जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। पेट्रो उत्पादों के मामले में उच्चतम स्लैब से टैक्स लगेगा। यह उच्चतम स्लैब फिलहाल 28 फीसद है। अपना राजस्व सुरक्षित रखने के लिए राज्यों को इस पर सेस (उपकर) लगाने का अधिकार मिलेगा।

केंद्र और राज्य अपना 40 फीसद राजस्व पेट्रोलियम उत्पादों के जरिये हासिल करते हैं। जीएसटी के फिलहाल चार स्लैब- 5, 12, 18 और 28 फीसद हैं। हालांकि इन उत्पादों पर कर की दर कितनी तय की जाए, इस संबंध में अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल ही करेगी। मोदी ने संभावना जताई की मौजूदा उच्चतम जीएसटी स्लैब को घटाकर 25 फीसद भी किया जा सकता है। इसके साथ ही 12 और 18 फीसद की टैक्स दर को आपस में मिलाया जा सकता है। इस तरह जीएसटी स्लैब में कमी लाई जा सकती है।