पाकिस्तानी में चाहिए तानाशाही: परवेज मुशर्रफ

नई दिल्ली ( 3 अगस्त ): पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने देश के पूर्ववर्ती सैन्य शासकों का बचाव किया है। मुशर्रफ ने कहा कि वे हमेशा देश को फिर से पटरी पर ले आए जबकि नागरिक सरकारों ने उसे पटरी से उतारा। मुशर्रफ देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे हैं। 1999 में नवाज शरीफ की नागरिक सरकार का सेना के जरिए तख्तापलट करने वाले मुशर्रफ ने यह भी दावा किया कि सत्ता से बेदखल किए गए प्रधानमंत्री की उनके तीसरे कार्यकाल में भारत के प्रति नीति बिल्कुल बिकी हुई थी यद्यपि उन्होंने यह नहीं समझाया कि उनका इससे क्या आशय है।

मार्च 2016 में पाकिस्तान छोड़ने के बाद से 73 वर्षीय मुशर्रफ दुबई में रह रहे हैं। मुशर्रफ कई आरोपों का सामना कर रहे हैं जिनमें संविधान का उल्लंघन करने और 2007 में आपातकाल घोषित करने के लिए देशद्रोह का आरोप शामिल है। मुशर्रफ पर 2 बार प्रधानमंत्री रही बेनजीर भुट्टो की 2007 में हत्या में संलिप्तता का भी आरोप है। उन्होंने कहा, ‘जो कोई भी पाकिस्तान के कल्याण के खिलाफ सक्रियता से काम करता है वह देश के खिलाफ है और उसे मार दिया जाना चाहिए।’ 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे मुशर्रफ ने 1999 में अपने हस्तक्षेप का बचाव करते हुए कहा कि वह देश को बचाना चाहते थे।

उन्होंने यह नहीं समझाया कि उस समय पाकिस्तान किस तरह के खतरे का सामना कर रहा था। उन्होंने पाकिस्तान में सेना द्वारा नागरिक सरकारों से सत्ता अपने हाथ में लेने का बचाव करते हुए कहा कि असली विकास केवल सैन्य शासनों के दौरान हुआ। उन्होंने नागरिक सरकारों पर सैन्य शासनों के दौरान हासिल उपलब्धियों को पलटने का आरोप लगाया। मुशर्रफ ने कहा, ‘सैन्य शासन हमेशा ही देश को पटरी पर लाया जबकि नागरिक सरकारों ने उसे हमेशा ही पटरी से उतारा।’ वह देश में अपनी वापसी पर इस बात को लेकर विश्वास में दिखे कि पाकिस्तानी सेना उनके पक्ष में खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, ‘मैंने सेना प्रमुख के तौर पर काम किया है और सेना हमेशा ही मेरे हित की रक्षा करेगी।’