यहां शादी में शामिल होने के लिए लेनी होगी पुलिस की परमिशन

नई दिल्ली (26 अगस्त): सामना में आज सरकार को जमकर खरी खोटी सुनाई गयी है। वजह है मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस सरकार ने जो नया कानून लादने की कोशिश की है। जिसमे अगर आपकी शादी में भी 100 लोग आने वाले हैं तो इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी और पुलिस की परमिशन के बाद लोग शादी में आ सकेंगे। सार्वजानिक स्थानों पर एकत्रित होना, उत्सव मनाना, हँसने खेलने की स्वतंत्रता पर अब पाबन्दी लग सकती है। 

सरकार अन्तर्गत सुरक्षा क़ानून के नाम तले महाराष्ट्र में आपातकाल का आधुनिक प्रयोग कर रही है। यदि ऐसा हुआ तो राज्य में क़ानून का राज ख़त्म होकर पुलिसवालों का राज शुरू हो जायेगा, उनको अमर्यादित अधिकार मिल जायेगा और शादी विवाह, नामकरण, भोज के लिए इकट्ठा होने वाले लोगों को रोज पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़ेंगे। 

ये 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लादे गए आपातकाल से भी ज्यादा खतरनाक हैं। ये सरकार लोगों की स्वतंत्र ख़त्म करने जैसा ही है। सामना में लिखा है की अगर अमिताभ बच्चन सड़क पर चलें और उन्हें देखकर उनकर  100 फैन इकठ्ठा हो जाएँ तो क्या आप उन्हें भी जेल में डाल देंगे। अगर शिवसेना के दफ्तर के बाहर प्रति दिन जो उत्साही कार्यकर्ता जमा होते हैं क्या उन्हें भी देश की स्वतंत्रता को खतरा बताकर  जेल में डाल दिया जायेगा।

स्कूल-कॉलेज के बाहर सैकड़ो लोग इकठ्ठा होते, किसी की शवयात्रा में भी सैकड़ों लोग शामिल होते है तो क्या उन्हें भी जेल भेज दिया जायेगा। ये सवाल अब राज्य की जनता के मन में उठ रहे हैं। संविधान की धारा 352(1) में कहा गया है कि भारत के या उसके किसी भी क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाये। फिर वह खतरा युद्ध, विदेशी आक्रमण, या अंतर्गत उद्रेक इसमें से किसके कारण भी उत्पन्न हुआ हो-ऐसा यदि राष्ट्रपति को विश्वास हो जाये तो तो वह देश में आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर सकते है। लेकिन महारष्ट्र में ऐसा क्या घटित हुआ है की अंतर्गत सुरक्षा को अचानक खतरा पैदा हो गया है।ऐसा करने वाले लोगों को स्वर्गीय बाबा साहेब आंबेडकर की फोटो लगाने का अधिकर नही है।