डिप्रेशन का शिकार होने लगे हैं घाटी के लोग

नई दिल्ली (20 अगस्त): शनिवार को घाटी में कर्फ्यू का 43वां दिन है। बुरहान वानी की मौत के बाद 9 जुलाई को कश्मीर में हिंसा शुरू हुई। घाटी के लोगों का कहना है कि कर्फ्यू के कारण कारोबार और व्यापार के अलावा कहीं आने-जाने पर भी पाबंदी है। यह स्थिति और लंबी खिंचती चली जा रही है और इससे लोग बेहद परेशान हो गए हैं। लोगों कहना है कि उनके सब्र का बांध टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

कई लोगों का कहना है कि अगर चीजें ऐसे ही चलती रहीं, तो उनमें से कई को मनोचिकित्सक के पास जाना पड़ेगा। शिकारा चलाना नाजिर मुहम्मद का पेशा है। अब कर्फ्यू में वह पथराई आंखों से सूनसान पड़ी डल झील को ताकते रहते हैं। नाजिर ने बताया, 'कई हफ्तों से मैं एक पैसा भी घर लेकर नहीं गया हूं। सरकार को क्या लगता है कि हम अपने बच्चों को आखिर कैसे खिला रहे हैं? हमारे घर का राशन कितने दिनों तक चलेगा? हमारी बचत के पैसे कितने दिन चलेंगे?' होटल और शिकारा मालिक गंभीर आर्थिक संकट झेल रहे हैं।