घर-घर में बनी हैं कब्रें, खाना तो दूर इन्हें नहीं मिलती अंतिम संस्कार के लिए जगह

नई दिल्ली (27 जनवरी): हमारे देश में टाटा, बिरला और अंबानी जैसे अरबों में खेलने वाले लोग हैं वहीं एक समाज ऐसा भी है जिन्हें मरने के बाद दफनाने के लिए जमीन तक नसीब नहीं होती। एक हिन्दी न्यूज बेवसाइट के अनुसार इस समाज की स्थिती इतनी खराब है कि इन्होंने घर में ही कब्र बना रखे हैं।

हम बात कर रहे हैं राजस्थान के कालबेलिया समुदाय की। यह समाज दुनियाभर में अपने डांस से देश और प्रदेश का नाम रौशन कर चुका है। लेकिन आज इस समाज के लोगों के हालात ऐसे हैं कि इन्हें अंतिम समय में उन्हें दो गज जमीन भी नसीब नहीं होती। 

इनके घर में घुसते ही किसी श्मशान में प्रवेश करने जैसा आभास होता है। इनकी परेशानी उस समय सबसे ज्यादा होती है जब इनके किसी परिजन की मौत होती है।

श्मशान या कब्रिस्तान में नहीं मिलती जगह छुआछूत जैसी बुराई इनके लिए अब भी अभिशाप बना हुआ है। कोई भी समुदाय इन्हें अपने श्मशान या कब्रिस्तान में शव को दफानने नहीं देता। खाली और बंजर जमीन पर भी अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जाता। नतीजा ये घर-आंगन में ही मृतक परिजन के शव को दफन कर समाधि बना देते हैं। 

स्कूल, पेयजल व्यवस्था, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को छोड़कर ये प्रशासन से दो गज जमीन मांगते हैं। इसी का नतीजा है कि जगह-जगह प्रशासन के पास इनके ढेरों ज्ञापन पड़े हुए हैं। इन पर सुनवाई इसलिए भी नहीं हो रही, क्योंकि इस समुदाय की राजनीतिक पकड़ भी कमजोर है।

इस समाज के लोगों को जीते जी मरने के बाद की चिंता सताती है। क्या पता उनके अंतिम संस्कार के लिए जमीन मिलेगी या नहीं? इसी चिंता में ये लोग मरने से पहले ही दफनाने के लिए जमीन की अर्जी लगा देते हैं।

राशन कार्ड, आधार कार्ड और निवास से जुड़े कागज नहीं होने के कारण इस समाज के लोग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। जबकि सरकार ने ऐसे लोगों के लिए कई योजनाएं (बीपीएल आवास योजना, अटल पेंशन योजना, रोजगार योजना, नि:शु्ल्क दवा योजना आदी) चला रखी हैं।