शहीद निरंजन की शव यात्रा में शामिल हुई 19 महीने की बेटी, सेना ने दी आखिरी सलामी

बेंगलुरू (5 जनवरी): जो उम्र पिता की गोद में खेलने और कंधे पर बैठने की है उस उम्र में मासूम अपने शहीद पिता की शव यात्रा में शामिल हुई। अभी ठीक तरह से पिता को पहचानना शुरू ही किया था कि पिता का साया सिर से उठ गया। पठानकोट में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए निरंजन सिंह की बेटी केवल 19 महीने की है। जब पठानकोट से पिता का शव घर पहुंचा तो दूसरे की गोद में बैठकर पिता के शव के आगे अगे चलती रही।

शहीद निरंजन का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव पहुंचा। शहीद का शव देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। उन्होंने एक जांबाज सिपाही और बहुत प्यारा लाल खो दिया था। पिता के कंधे पर बेटे को खोने का बहुत बड़ा दुख है। लेकिन गर्व है कि बेटे की जान देश के काम आई।

ये निरंजन की बहादुरी ही थी कि वो पठानकोट में आतंकियों से लोहा लेने के लिए आगे बढ़े। एक आतंकी की लाश पर लगे आईईडी को डिफ्यूज़ करते समय उसमें विस्फोट हो गया। इसमे निरंजन बुरी तरह घायल हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

शहीद लें कर्नल निरंजन को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। लें कर्नल निरंजन अब दुनिया में नहीं हैं। उनके परिवार पर आया दुख शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। पूरा देश इस वक्त शहीद निरंजन को सलाम कर रहा है लेकिन बावजूद इसके इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती।