परमाणु बम बनाने का समान बताकर करोड़ों की ठगी, एक अधिकारी गिरफ्तार

महेंद्र कुमार मीना, श्रीवत्सन, जयपुर (3 अगस्त): परमाणु बम बनाने के काम आने वाला रेडियो एक्टिव पदार्थ बताकर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले गैंग के तार मुंबई क्रिकेट से जुड़े हैं। फर्जी वैज्ञानिक सुनील राजेंद्रन सहित 12 लोगों के पकडे जाने के बाद अब मुंबई का प्रवीण बामरे को भी गिरफ्तार किया गया है। प्रवीण बामरे एमजीआई क्रिकेट क्लब बांद्रा मुंबई का अध्यक्ष और एयर इंडिया से रिटायर डीजीएम है। जिससे पूछताछ के बाद इस गोरखधंधे से जुड़े कई और नाम सामने आने की संभावना है।

वैसे अब तक इस मामले में इस मामले में दो फर्जी वैज्ञानिक सहित 10 आरोपी रिमांड पर चल रहे हैं। आपको बता दे की यह गिरोह 1 करोड़ में इसे खरीदने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 100 करोड़ में बेचने के मनसूबे पाल रहा था। अब तक सबसे बड़ा नाम मुंबई के प्रवीण बामरे का समने आया है। प्रवीण बामरे पर रेडियो एक्टिव पदार्थ बताकर उसे बिकवाने का झांसा देने का आरोप है। सूचना के आधार पर दौसा पुलिस और ATS की एक टीम ने प्रवीण बामरे को मुंबई से गिरफ्तार किया। बामरे कर्मवीर क्रिकेट क्लब मुंबई का सदस्य भी है। इस मामले में रेडियो एक्टिव पदार्थ खरीदने का सौदा करने वाले सूरत निवासी छगन भाई को प्रवीण ने ही कहा था कि वह इस पदार्थ को सौ करोड़ रुपये से अधिक में भारत सरकार को या विदेश में किसी बड़ी कंपनी को बिकवा देगा।

मुंबई में प्रवीण की शानो-शौकत देखकर छगन भाई को भी विश्वास हो गया था कि वह इस पदार्थ को बिकवा सकता है। इस तरह छगन इस गिरोह के झांसे में आ गए। अब तक की जांच में यह भी पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी प्रवीण के संपर्क महाराष्ट्र में कई नेताओं और बड़े अधिकारियों से हैं। इनकी मदद से उसने इस फर्जी रेडियो एक्टिव पदार्थ को असली बताने का सर्टिफिकेट और दूसरे दस्तावेज भी बनवा लिए थे। सूत्रों की मानें तो उसके खिलाफ सीबीआई में भी कई मामले चल रहे हैं, जिसके बाद अब अन्य सुरक्षा एजेंसिया भी दौसा पुलिस से जानकारी हासिल कर रही हैं।

करीब 10 दिन पहले यह मामला उस वक़्त सामने आया था, जब गिरोह ने सूरत के मामा-भांजा से रेडियो एक्टिव पदार्थ बेचने के नाम पर 16 लाख रुपए ठग लिए थे। इंटरनेट पर हुई जान पहचान के बाद ये सभी लोग आपस में मिले थे और डिल के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से राजस्थान के दौसा में आए, जहां एक बंगले में इनकी सौदेबाजी चल रही थी। सूचना मिलने पर एटीएस और दौसा पुलिस की टीम ने दबिश देकर फर्जी रेडियो एक्टिव पदार्थ बेचने और उसके खरीदने वाले 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इन लोगों के कब्जे से रेडियोधर्मी तत्वों की जांच करने वाली किट और यूएस के परमाणु ऑथोरिटीज के फैक टेग लगे सामान के साथ कथित रेडियो एक्टिव पदार्थ भरे कांच में बंद सुराही को भी जब्त कर लिया गया था।

यह यही ठगी कितनी बड़ी थी, इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि की जयपुर के एक होटल में आरोपी सुनील राजेंद्रन के कमरे से यूएसए की फर्जी मोहर, कागजात और करोडों रुपए के डील प्रोफार्मा भी जब्त हुए हैं। जांच में सामने आया कि डील होते ही इस प्रोफार्मा के आधार पर एग्रीमेंट करवा लेते। हालांकि इस पूरे गिरोह का मास्टर माईंड सुनील और मुंबई निवासी प्रवीण बामरे गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन पुलिस को लगता है कि जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ती जाएगी बड़े लोगों के चहरे भी सामने आएंगे।