पैलेट गन आखिरी रास्ता, इसका मकसद जान लेना नहीं: SC में केंद्र

नई दिल्ली(10 अप्रैल): जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, "इसके इस्तेमाल का मकसद किसी की जान लेना नहीं है, पैलेट गन प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने का आखिरी रास्ता है।"


- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अटॉर्नी जनरल ने कहा, "भीड़ को काबू करने के लिए पैलेट गन की जगह रबर बुलेट के इस्तेमाल जैसे अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। रबर बुलेट पैलेट गन की तरह घातक नहीं है।"


- बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की पैलेट गन बंद कराने की मांग वाली पिटीशन पर सुनवाई चल रही है। 27 मार्च को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने केंद्र सरकार को पैलेट गन का विकल्प ढूंढने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के बजाय गंदा बदबूदार पानी, केमिकलयुक्त पानी या ऐसा कोई अन्य विकल्प आजमा सकते हैं। इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचेगा। कोर्ट ने इस पर सरकार से 10 अप्रैल तक जवाब मांगा था।


- चीफ जस्टिस जेएस खेहर के यह पूछने पर कि क्या पथराव करने वालों में बच्चे भी शामिल होते हैं, रोहतगी ने कहा था, "हां...बच्चे और महिलाएं भी भीड़ में होते हैं। भीड़ के हमले में सुरक्षा बल यह तय नहीं कर सकते कि बचाव में किस पर पैलेट चलाएं और किस पर नहीं। तब जान, सामान और कैम्प की सुरक्षा ही सबसे अहम रहती है।"


- पिटिशनर के वकील आरके मिश्रा ने कहा था, "पैलेट से बहुत ज्यादा चोट लगती है। कई बच्चों की आंख फूट गई। कई बेकसूर भी इसका शिकार हुए।" इस पर रोहतगी बोले, "जम्मू-कश्मीर के हालात का अंदाजा वही लगा सकता है जो उन हालात को झेल रहा है। मौजूदा स्थिति में सुरक्षा बलों की रक्षा के लिए पैलेट गन ही सही विकल्प है।"


- चीफ जस्टिस खेहर ने कहा, "यहां बैठकर हम कश्मीर के हालात का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। इस मांग पर विचार के साथ ही सुरक्षा बलों और जनता को कोई हानि भी नहीं होनी चाहिए। सरकार पैलेट के बजाय गंदा बदबूदार पानी जैसे अन्य विकल्पों पर विचार कर 10 अप्रैल तक जवाब दे।"