कश्‍मीर में पैलेट गन बंद होगी क्या?

नई दिल्ली (21 जुलाई): कश्‍मीर में प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल में करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन इस्तेमाल करने का मुद्दा संसद में गूंजा। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर में हिंसा को को रोकने के लिए जिन पैलेट बंदूक से फायरिंग की जा रही है, जिससे युवा अंधे हो रहे हैं।

इसका जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ‍ सिंह ने कहा कि वह पैलेट गन का प्रयोग प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए किया जा रहा है। इससे लोगों के अंधे होने की जो बात कही जा रही है, उसके बारे में सरकार को जब सूचना मिली तो उन्होंने डॉक्टरों की टीम भेजी।

एक बार फायर होने से सैकड़ों छर्रे निकलते हैं जो रबर और प्लास्टिक के होते हैं ले देकर पुलिस और सीआरपीएफ के पास पैलेट गन ही बचती है। इसके एक बार फायर होने से सैकड़ों छर्रे निकलते हैं जो रबर और प्लास्टिक के होते हैं। ये जहां-जहां लगते हैं उससे शरीर के हिस्से में चोट लग जाती है। अगर आंख में लग जाए तो वह काफी घातक होता है। इसकी रेंज 50 से 60 मीटर होती है। छर्रे जब शरीर के अंदर जाते हैं तो काफी दर्द तो होता है। पूरी तरह ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं।   - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीनगर के महाराजा हरि सिंह हॉस्पिटल में अभी तक पैलेट गन से घायल 92 लोगों का ऑपरेशन किया जा चुका है। - इसके अलावा इस गन से घायल होने वालो की संख्या हर घंटे बढ़ रही हैं। इसके चलते उन्हें ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन बंद करना पड़ा। - डॉक्टर्स के मुताबिक चोटें इतनी खतरनाक हैं कि लगता है अब उनकी आंख की रोशनी कभी वापस नहीं आएगी। - बता दें कि अब तक हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 32 तक पहुंच गया है। वहीं घायलों की संख्या 1400 से ज्यादा है।

क्या है पैलेट गन, कैसे करती है काम - कश्मीर में विरोध को रोकने के लिए 2010 से ही पुलिस पैलेट गन का यूज कर रही हैं। तब पुलिस ने इसे नॉन-लीथल हथियार होने के चलते यूज करना शुरू किया था। - नॉन-लीथल हथियार उन्हें कहा जाता है, जिसके यूज से मरने के चांसेस कम होते हैं लेकिन हर साल पुलिस इसका यूज बढ़ाती गई। - इस बंदूक से सैकड़ों छर्रे निकलते हैं जिनसे शरीर पर कई तरह की चोटें आ सकती हैं। छर्रे को तेजी से बाहर निकालने के लिए हाइड्रॉलिक बल का इस्तेमाल किया जाता है। - पैलेट के छर्रे आंख में घुस जाते हैं और आंख के टिश्यू को धीरे-धीरे खराब करने लगते हैं।