भारत का चीन को जवाब, सीमा पर शांति से ही मजबूत होंगे आपसी संबंध

नई दिल्ली ( 3 अगस्त ): सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में भारत और चीन के बीच लगातार तनाव जारी है। डोकलाम मुद्दे पर चीन लगातार धमकी दे रहा है। इसके बीच भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि सीमाई इलाकों में शांति दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक अहम शर्त है। डोकलाम पर चीन सरकार के एक दस्तावेज पर आधिकारिक जवाब देते हुए भारत ने कहा कि डोकलाम मुद्दे पर 30 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में नई दिल्ली का रुख साफ कर दिया गया था। 

30 जून को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया था, 'भारत चीन की हाल की कार्रवाई से बेहद चिंतित है। भारत ने डोकलाम में सड़क निर्माण के मसले पर चीनी सरकार को अपनी चिंता से अवगत कराया था। इस निर्माण से यथास्थिति में बदलाव आएगा और यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। मौजूदा समय में सभी पक्ष द्विपक्षीय सहमतियों को माने और एकतरफा तरीके से यथास्थिति को नहीं बदलें।'

सरकार ने साफ किया कि डोकलाम मुद्दे पर पिछले डेढ़ महीने से जारी विवाद पर भारत का रुख पहले वाला ही है। सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। गौरतलब है कि डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच डेढ़ महीने से ज्यादा समय से तनातनी जारी है। इससे दोनों देशों के रिश्तों में भी तल्खी बरकरार है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने आज जारी एक 15 पेज के डॉजियर में कहा था कि भारत डोकलाम से अपनी सेना वापस बुलाए तभी दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है। डॉजियर में कहा गया है कि डोकलाम में भारतीय सेना की एंट्री चीनी संप्रभुता का सरेआम उल्लंघन है। भारत ने भूटान की संप्रभुता और सुरक्षा का भी उल्लंघन किया है। 

विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन दोनों पक्षों को डोकलाम से सेना हटाना होगा। पिछले महीने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में कहा था, 'हम बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए दोनों देशों को अपनी सेनाओं को पुरानी जगह पर ले जाना होगा। जबतक यह मसला चीन और भूटान के बीच था, हम इसमें नहीं पड़े। पर बात जब ट्राई-जंक्शन पर आई तो यह हमसे सीधे जुड़ा था। अगर चीन यथास्थिति में बदलाव करता तो यह हमारे सुरक्षा के लिए खतरा था।'

बता दें कि डोकलाम में 16 जून को भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनातनी बढ़ी थी। भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को सिक्किम सेक्टर में भारत-चीन बॉर्डर पर सड़क निर्माण करने से रोका। भारत सिक्किम बॉर्डर को अपना इलाका मानता है, जबकि चीन 1890 की संधि का हवाला देकर इस क्षेत्र को अपना बताता है।