सार्वजनिक स्थल पर कूड़ा फेंकने वालों की खैर नहीं, लगेगा 10 हजार जुर्माना

नई दिल्ली ( 19 दिसंबर ): सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा फेंकने वालों की अब खैर नहीं है। सार्वजनिक स्थलों कूड़ा फेंकने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाने का आदेश देते हुए कहा है कि देश खासकर दिल्ली में शहरी कचरा प्रदूषण का सबसे गंभीर कारक है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत सभी अथॉरिटी का यह वैधानिक उत्तरदायित्व है कि कचरा उठाकर, ढुलाई ठिकाने लगाया जाए ताकि इससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या न हो। कचरा निकालने वाले सभी स्रोतों जैसे होटलों, रेस्टोरेंट, बूचड़खाने, सब्जी मंडियों इत्यादि को नियमानुसार कचरा अलग-अलग करना चाहिए। अगर कोई निर्देशों का पालन नहीं करते तो उन पर हर बार उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। एनजीटी ने कहा कि देश की राजधानी से हर दिन 9600 मीट्रिक टन शहरी कचरा निकलता है। इसके बावजूद नगर निगमों के पास इस कचरे को ठिकाने लगाने की कोई योजना मौजूद नहीं है।

पीठ ने निगमों के आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे एक माह के भीतर एक योजना बनाकर ट्रिब्यूनल को पेश करें जिसमें स्पष्ट: यह उल्लेख हो कि जो लोग कचरे को अलग-अलग करके निगमों को सौंप रहे हैं उन्हें किस तरह प्रोत्साहित किया जाएगा। पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट मिल सकती है। साथ ही जो लोग कचरा अलग-अलग कर नहीं दे रहे हैं उन पर पेनाल्टी का विचार भी किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि यह बात साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए कि प्रदूषण करने वाले को हर्जाना भरना पड़ेगा। अगर कचरा निकल रहा है तो संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि उसका उचित ढंग से निपटान किया जाए न कि उसे इधर उधर फैलाकर दूसरों को असुविधा तथा प्रदूषण बढ़ाया जाए। पूरा बोझ सरकार या प्रशासन पर नहीं डाला जा सकता। पीठ ने यह निर्देश दिल्ली में लैंडफिल साइट्स के आस-पास की स्थिति के संबंध में दायर एक याचिका पर दिया।