पटना में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (31 दिसंबर): बिहार की राजधानी पटना में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ गया है। पटना में बढ़ते बर्ड फ्लू के मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मूड में दिख रहा है। पक्षियों के बाद बर्ड फ्लू का वायरस एच5-एन1 का अटैक आम इंसान पर नहीं हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने गुलजार बाग स्थित इन्फेक्शन डिजीज अस्पताल (आइडीएस) को अलर्ट कर दिया है। यहां 50 बेडों का अलग से वार्ड बनाया गया है. साथ ही वहां पर तैनात डॉक्टरों को अलर्ट किया गया है कि अगर किसी तरह के मरीज फ्लू से संबंधित आते हैं तो तुरंत भर्ती कर इलाज किया जाये। जानकारी के मुताबिक गुलजार बाग स्थित आइडीएस के सरकारी अस्पताल में बर्ड या स्वाइन फ्लू के मरीजों को रखा जाएगा।  

इन सबके बीच पटना के जू में एक और मोर की मौत हो गई है। साथ ही पटना आर्ट कॉलेज परिसर में लगातार हो रही पक्षियों की मौत के बाद जिला प्रशासन के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। इसी कड़ी में आज सुबह जिला प्रशासन के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पटना आर्ट कॉलेज परिसर में पहुंचे और मृत पक्षियों को जब्त किया। पटना जिला पशुपालन अधिकारियों का कहना है कि जांच के लिए मृत पक्षियों को कोलकाता लैब भेजा जाएगा ताकि इन पक्षियों की मौत के कारण का पता लगाया जा सके। आपको बता दें कि पिछले तीन दिनों के दौरान पटना आर्ट कॉलेज में दर्जनों पक्षियों की मौत हो गई। जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने पटना जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद एहतियातन कॉलेज को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा सकता है।

 

बर्ड फ्लू वायरस को लेकर सचेत पटना जू प्रशासन ने अपने नौ जू कर्मियों का ब्लड सैंपल पटना सिटी के आरएमआरआइ में जांच के लिए भेजा है। यह कर्मी डॉक्टर, कंपाउंडर या जानवरों के केयर टेकर हैं। जांच का उद्देश्य बस इतना भर है कि बर्ड फ्लू का असर उन पर तो नहीं पड़ा। पटना जू के निदेशक अमित कुमार का कहना है कि इस मामले में नेशनल वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट को पत्र लिख कर एक्सपर्ट भेजने का आग्रह किया है। इन सबके बीच जू में दवाओं का छिड़काव लगातार जारी है। टैमी फ्लू दवा की 100 फाइल मिली है जबकि मास्क और ग्लप्स की भी आपूर्ति हो रही है। पहली जनवरी को जू खुलने की संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सैंपल जांच से पहले तीन दिन उसे लैब में रखना होता है। ऐसे में किसी भी सूरत में एक जनवरी तक दूसरी रिपोर्ट नहीं आने वाली. अगले साल के पहले हफ्ते में ही निर्णय हो पायेगा कि जू अगले कितने दिनों तक बंद रखा जायेगा।