'गब्बर' हार्दिक इज बैक

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (14 जुलाई): हार्दिक पटेल 15 जुलाई को जेल से बाहर आ जायेंगे। 48 घंटे का जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन का रोड़ मैप भी तैयार हो चूका है, लेकिन रिहाई के बाद कहा होगा उसका अगला ठिकाना ये कोई नहीं जानता।

फ़िलहाल यूपी और राजस्थान हार्दिक के नए ठिकाने होंगे, इस तरह की अटकलें लगाईं जा रही है जिसकी अपनी वजह है। जिन पाटीदारों के आरक्षण का आंदोलन हार्दिक पटेल ने गुजरात में चलाया और सरकार से नाक में दम कर दिया, यूपी में वो कुर्मी जाति के नाम से जाने जाते हैं। पटेल और कुर्मी लगभग एक ही जाति मानी जाती है, कुशवाहा, शाक्य, कटियार, मौर्य और निरंजन भी इसी जाति के होते हैं। यूपी में इनकी आबादी लगभग साढे आठ फीसदी है और ये ओबीसी में शामिल हैं।

हार्दिक पटेल ऐसे समय पर रिहा हो रहे हैं, जब यूपी में कुर्मी वोटों को हडपने की मारा मारी मची हुई है। बगल के राज्य बिहार से आकर नीतीश कुमार भी इसी वोट बैंक को लुभाने में लगे हैं। ऐसे में हार्दिक पटेल यूपी का रुख कर वहां के चुनावी गणित में उलटफेर करेने की फ़िराक में हो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट के मुताबिक 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अब एक साल का वक्त रह गया है। गुजरात में पाटीदार 17 प्रतिशत हैं, लेकिन सौराष्ट्र, उत्तर गुजरात और दक्षिण गुजरात की राज्‍य की करीब 50 सीटों पर पाटीदार वोट हावी रहते हैं। अगर हार्दिक पटेल के जेल से बहार आने के बाद ये आंदोलन और तेज हुऐ तो बीजेपी को पाटीदारों की नाराजगी का भारी खामियाजा 2017 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। हालांकि बीजेपी बार-बार यही राग आलाप रही है कि हार्दिक को जेल से छुडाने में सरकार कि अहम भूमिका है।