पाकिस्तान में सेना की के खिलाफ सड़कों पर उतरे पश्तून

नई दिल्ली (12 अप्रैल): पाकिस्तान में एक लाख पश्तूनों ने सरकार और सेना के खिलाफ विशाल रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने संघ प्रशासित कबायली इलाके फाटा में युद्ध अपराध मामलों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की मांग की। खैबर पख्तूनवा और फाटा से हजारों की संख्या में लोग पिशताखरा चौक पर जमा हुए और उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की।

इस विशाल रैली में लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तस्वीर लिए मार्च में शामिल हुए। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया के जरिये इतनी बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान की सड़कों पर उतरे और स्थानीय लोगों को सरकारी दमन के बारे में बताया। हालांकि पाकिस्तान की टेलीविजन मीडिया में इतने बड़े धरना प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया।

इस मार्च के ज़रिए पश्तूनों की पाकिस्तान सरकार से ये भी मांग है कि संघ प्रशासित कबायली इलाके से कर्फ्यू खत्म किया जाए। स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोले जाएं, क्योंकि इससे इस इलाके में आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके समुदाय के मानवाधिकारों का पाकिस्तान उल्लंघन कर रहा है और उनके साथ गुलामों जैसे सलूक कर रहा है।

पाकिस्तान में बगावत का ये बिगुल 26 साल के मंजूर पश्तीन के नेतृत्व में हुआ। मंजूर पश्तीन पश्तून आंदोलन के नेता हैं। मंजूर पश्तीन जनजातीय इलाके के वेटनरी छात्र हैं। उनके उदय को एक नए सीमांत गांधी के रूप में देखा जा रहा है। पेशावर में आंदोलन से पहले मंजर पश्तीन ने एक बयान जारी कर कहा था कि हम हिंसा में यकीन नहीं करते हैं। ना तो हम आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हैं और ना ही हमारा इरादा हिंसा का है। अब ये सरकार पर है कि वो हमें अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के हक का इस्तेमाल करने देती है या हमारे खिलाफ हिंसक तरीका अपनाती है।

पश्तीन दक्षिण वजीरिस्तान से ताल्लुक रखते हैं, जो पश्तून बहुल संघ प्रशासित जनजातीय इलाके (फाटा) का हिस्सा है। पीटीएम कुछ दिन पहले तब सुर्खियों में आया था, जब एक युवा पश्तून की सिंध पुलिस ने हत्याकर दी थी और हत्या के विरोध में जनजातीय इलाके के हजारों लोग इस्लामाबाद पहुंचे थे।

हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के आतंक के कारण पांच लाख लोग अफगानिस्तान पलायन कर गए हैं, लाखों युवा लापता हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान सरकार पख्तूनों को काफी भ्रमित कर लिया है। पाकिस्तान ने इस इलाके को आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप के रूप में इस्तेमाल करती है, जिससे पश्तूनों को काफी दिक्ततों का सामना करना पड़ा रहा है।