आखिरी मैच में हारने के बाद भी इस वजह से खुश हैं बोल्ट

नई दिल्ली(6 अगस्त): दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट अपने को लीजैंड बताते हैं, लेकिन उनको जो जीत की आदत पड़ी उसके पीछे उनके माता-पिता हैं। मौज-मस्ती, आरामतलबी और एक शौमैन बोल्ट का मैदान और मैदान के बाहर एक संवेदनशील पक्ष भी है। हर बेटे की तरह बोल्ट भी अपनी मां से बेहद प्यार करते हैं। 

- बोल्ट को दुनिया में कोई रुला सकता है वह हैं सिर्फ उनकी मां। बोल्ट ने कहा कि अगर मैं उनको नाखुश करुं, या उनको दुखी करुं, या हम बात ना करें या कुछ गलत हो जाए तो मैं बहुत रोता हूं। मैं पूरी तरह से मां का लाड़ला हूं। 

- बोल्ट के मुताबिक एक घटना 2002 की है। जब जमैका में जूनियर चैंपियनशिप के दौरान चैंजिंग रुम में मैं रो रहा था तो उस समय मेरी मां बहुत बडी भूमिका अदा की थीं। उन्होंने एक दवाई के रुप में काम किया।

- बोल्ट की मां जेनिफर ने कहा कि जब मैं उससे बात की तो वह चुप हो गया। उसने कहा सब ठीक है मां. मैं अपना बेस्ट करुंगा।

- शनिवार को अपने आखिरी मैच में हारने के बाद भी बोल्ट की आंखों में आंसू नहीं थे। लेकिन उनकी महानता कायम रहेगी।

- बोल्ट ने 2008, 2012 और 2016 के ओलिंपिक में 100 और 200 मी में गोल्ड मेडल जीता था। शनिवार को हारने के बाद बोल्ट ने कहा कि आखिरी मैच जीत ना पाने के कारण मैं माफी मांगता हूं लेकिन सभी के समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं। हमेशा की तरह ये अनुभव शानदार रहा।