नशे में ड्राइविंग करने वाले अब नहीं बचेंगे, सरकार उठाने वाली है सख्त कदम!

नई दिल्ली(23 दिसंबर): सरकार नशे में ड्राइविंग से होने वाली मौत को लेकर सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है। ऐसे किसी केस में अभी सेक्शन 304ए के तहत सजा के तौर पर दो साल की जेल, फाइन या दोनों होते हैं। सरकार अब सजा की अवधि बढ़ाकर 7 साल जेल करने के पक्ष में है। इसके साथ ही वाहन रजिस्ट्रेशन के वक्त ही थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य करने का कदम भी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

- बता दें कि सुप्रीम कोर्ट भी नशे में ड्राइविंग से होने वाली मौतों के केसेज में टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने मौजूदा सजा को अपर्याप्त बताते हुए और भी सख्त सजा दिए जाने की वकालत की थी। 

- इससे पहले एक स्टैंडिंग कमिटी ने नशे में ड्राइवर्स से होने वाली मौतों के मामले में गैर इरादतन हत्या का मामला चलाए जाने का सुझाव दिया था। इसमें 10 साल जेल की सजा का प्रावधान है। 

- देश में कुल वाहनों में से कम से कम आधे वाहनों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं है। इनमें से अधिकतर टू वीलर्स हैं। ऐसे वाहनों से होने वाले रोड ऐक्सिडेंट्स के विक्टिम्स को हर्जाना नहीं मिल पाने की आशंका बनी रहती है। 

- संसदीय कमिटी ने राज्यसभा में शुक्रवार को मोटर वीइकल्स (अमेंडमेंड) बिल की रिपोर्ट जमा की। इसमें रोड ट्रांसपॉर्ट मिनिस्ट्री ने 15 मुद्दों को लेकर ऐक्ट में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इन्हीं में से एक प्रस्ताव नशे में ऐक्सिडेंट्स से होने वाली मौत में सजा की अवधि बढ़ाने का भी है। 

- ट्रांसपॉर्ट मिनिस्ट्री के चार सदस्यीय पैनल ने संसदीय कमिटी को यह भी बताया कि वाहनों की स्पीड को कंट्रोल करने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं। इसमें विशेषतौर पर सड़क पर रेसिंग और स्टंट करने वालों को लेकर नियम बनाने का जिक्र है। इसके साथ ही 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाले कमर्शल वाहनों में दो ड्राइवर्स का होना अनिवार्य किए जाने का भी प्रस्ताव है। 

- पैनल ने ट्रैफिक रूल्स से जुड़े नए नियम और कानूनों को लागू करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही यह सुझाव भी दिया गया है कि प्रत्येक ट्रैफिक पुलिसमैन या ट्रांसपॉर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी के पास बॉडी कैमरे हों ताकि यातायात नियमों का उल्लंघन वाले की करतूत डिजिटली स्टोर हो सके। कमिटी को ऐसा लगता है कि ऐसा होने से करप्शन में भी कमी आएगी।