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संसद पर आतंकी हमले की 18वीं बरसी आज, इस आतंकी ने रचा था पूरा षडयंत्र

13 दिसंबर को ठीक 18 साल पहले लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली भारतीय संसद (Parliament) पर एक बड़ा आतंकी हमले (Terrorist Attack) की अंजाम को दिया गया था। आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ था।

Parliament, लोकसभा

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(13 दिसंबर): 13 दिसंबर को ठीक 18 साल पहले लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली भारतीय संसद (Parliament) पर एक बड़ा आतंकी हमले (Terrorist Attack) की अंजाम को दिया गया था। आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ था। 13 दिसंबर 2001 को जब संसद (Parliament) का शीतकालीन सत्र चल रहा था, विपक्ष खूब हंगामा कर रहा था, जिसकी वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। सदन में जब सेशन चल रहा हो तो अक्सर यही होता है, लेकिन उस दिन वहां मौजूद तमात नेताओं से लेकर कर्मचारियों और गार्ड किसे पता था कि आज के दिन को संसद पर आतंकी हमले के लिए याद किया जाएगा।

उस दिन पूरा देश थर्रा उठा, क्योंकि ये हमला देश की राजधानी और लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन पर हुआ. आज भारत की संसद पर हुए हमले के 17 साल बीत गए और इस हमले की 18वीं बरसी को याद कर रहे हैं. साल 2001 में आज के ही दिन संसद पर हमले को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टर माइंड था अफजल गुरु हमले में सुरक्षाकर्मियों ने 5 आतंकी मार गिराए गए। वहीं, 9 लोगों की जान चली गई तो कई घायल हो गए। हमले के बाद 15 दिसंबर 2001 को दिल्ली पुलिस ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य अफजल गुरु को जम्मू-कश्मीर से पकड़ा। दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज के एसएआर गिलानी के अलावा दो अन्य अफसान गुरु और उसके पति शौकत हुसैन गुरु को पकड़ा गया। मामले की सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट ने 18 दिसंबर 2002 को अफजल गुरु, शौकत हसन और गिलानी को मौत की सजा देने का फरमान सुनाया और अफसान गुरु को बरी कर दिया गया।

वहीं, 29 अक्टूबर 2003 को गिलानी दिल्ली हाईकोर्ट से बरी हो गया। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 4 अगस्त 2005 को शौकत हसन की सजा-ए मौत को बदलकर 10 साल सश्रम कारावास कर दिया गया। अफजल गुरु को मिली सजा-ए-मौत मुकर्रर रही और फिर वो दिन आया जब अफजल गुरु को फांसी मिली। संसद हमले के 12 साल बाद 9 फरवरी 2013 को दोषी अफजल गुरु को सूली पर चढ़ाया गया।

हालांकि, आतंकवादी अफजल गुरु को आखिरी वक्त तक यही लग रहा था कि उसकी भी फांसी की सजा बदल जाएगी। उसे यही उम्मीद थी की उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 8 फरवरी को अफजल गुरु को बताया गया कि अगले दिन सुबह 8 बजे उसे फांसी दी जाएगी और ये सुन उसे ये एहसास हो गया कि उसकी जिंदगी के ये कुछ आखिरी पल हैं।


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