पैराडाइज पेपर्सः जयंत सिन्हा ने दी सफाई, मंत्री बनने से पहले छोड़ दी थी कंपनी

नई दिल्ली ( 6 नवंबर ): पैराडाइज पेपर्स में नाम आने पर केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि पैसों का लेन-देन निजी उद्देशय के लिए नहीं हुआ था। सिन्हा ने कहा है कि लेनदेन मैंने अपने लिए नहीं, कंपनी के लिए किया था और जब मैं राजनीति में भी नहीं था और सबकुछ बताकर किया गया था। 

जयंत सिन्हा का कहना है कि उन्होंने जो भी लेनदेन किया था वह कंपनी की तरफ से किया था और वह पूरी तरह से कानूनी और प्रमाणिक था। हमने जो कुछ भी किया है पूरी तरह से वैध था। शक की कोई वजह नहीं है।

यह है पूरा मामला इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट यानी (ICIJ) के जरिये किए गए इस खुलासे को पैराडाइज पेपर्स का नाम दिया गया है। इससे संबंधित एक करोड़ से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स जर्मनी के अखबार सूडेयूटस्चे जीतियांग के पास मौजूद हैं। उन्होंने दुनियाभर के 96 मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर इन दस्तावेजों की जांच की है।

करोड़ों की संख्या में मौजूद इन दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि 180 देशों के सबसे ज्यादा लोगों ने काला धन देश से बाहर निकालने के लिए विदेशी कंपनियों का सहारा लिया है। उनमें भारत का स्थान 19वां है। इस सूची में मान्यता दत्त जैसे कई बॉलीवुड स्टार का नाम शामिल हैं। जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 714 भारतीयों ने इनमें पैसा लगाया है।

मोदी सरकार में केंद्रीय विमानन मंत्री जयंत सिन्हा का नाम पैराडाइज पेपर्स लीक में सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, जयंत सिन्हा मंत्री बनने से पहले ओमेडियार नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर थे और इसी ओमेडियार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में एक बहुत बड़ा निवेश किया था।

इसमें खास बात यह है कि डी लाइट डिजाइन ने टेक्स हेवेन केमैन आइलैंड में अपनी एक सब्सिडियरी कंपनी बनाई थी। जाहिर तौर पर ये सब कुछ टैक्स और काली कमाई बचाने के लिए की गई कवायद थी।

टेक्स हैवेन देशों में निवेश की पोल खोलने वाली लीगल फर्म ऐपलबी के मुताबिक, डी लाइड डिजाइन ने केमैन आइलैंड स्थित सब्सिडियरी कंपनी से 30 लाख अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया था। कर्ज 2012 में लिया गया और उस वक्त जयंत सिन्हा ओमेडियार के डायरेक्टर के पद पर नियुक्त थे।