अल्पसंख्यक इलाकों को तोहफा देगी मोदी सरकार

नई दिल्ली(7 जुलाई): अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा की कमी का उल्लेख करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एक पैनल स्थापित किया है जिसमें केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर अल्पसंख्यक जिलों में 211 सेंट्रल स्कूल स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

- अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने के लिए दिसंबर में मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन और अफजल अमानुल्ला के नेतृत्व में समिति की स्थापना की गई थी।

- पैनल ने प्रत्येक स्कूल के लिए 20 करोड़ रुपये और उसके वार्षिक परिचालन के लिए 3 करोड़ रुपये लागत राशि मुहैया कराने की पेशकश की है। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि विद्यालय 9.30 बजे से शुरू हो ताकि छात्र स्कूल आने से पहले मदरस जा सकें।

- स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ने वालों की जांच के लिए पैनल ने विभिन्न राज्यों के अल्पसंख्यक जिलों में 25 सामुदायिक कॉलेजों की स्थापना की सिफारिश की है। इन कॉलेज में छात्रों को डिग्री कोर्सेज और स्किल सर्टिफिकेट मुहैया कराए जाएंगे जिससे वे बेहतर भविष्य बना सकें। आने वाले समय में यह योजना ढंग से लागू हो इसलिए इसकी कार्रवाई के लिए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी एक बैठक आयोजित कर सकते हैं।

- विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और संबद्ध विज्ञान, वास्तुकला योजना और डिजाइन, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन,अक्षय ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष शिक्षा को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के 5 संस्थानों की स्थापना की जाने की भी सिफारिश की गई है।

- पैनल ने 2001 और 2011 के जनगणना के आंकड़ों को देखते हुए बताया कि मुस्लिम विशेष रूप से शिक्षा और कौशल विकास के पीछे होते जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, 'अगर हम साक्षरता दर, नामांकन दर, सभी अल्पसंख्यकों की शिक्षा को देखें तो यह साफ पता चलता है कि मुसलमान सबसे अधिक वंचित हैं।'

- रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि 2001 में मुस्लिमों की साक्षरता दर 59.1 फीसदी थी और 2011 में यह 64.8 फीसदी थी, जो कि क्रमश: 68.53 फीसदी और 72.98 फीसदी की औसत दर से काफी कम है। मुसलमानों और शेष आबादी के बीच नामांकन दर में भी काफी देखने को मिला है।