100 साल से रोजाना इस खतरनाक पुल को पार करती है भारतीय ट्रेन

कुन्दन सिंह, नई दिल्‍ली (23 फरवरी): भारतीय रेलवे जिसने बीते सालो में कई बदलाव देखे है, लेकिन कुछ तस्वीरें आज भी नहीं बदली। हम बात कर रहे हैं उस पुल की जिस पर गलती की गुंजाइश नहीं है। वहां सावधानी हटने का मतलब दुर्घटना नहीं बल्कि भीषण दुर्घटना है। उस ट्रैक पर जैसे ही ट्रेन जाती है यात्रियों की सांसे रूक जाती हैं, लेकिन बावजूद इसके भारतीय रेलवे के अनुभवी ड्राइवर्स पिछले 100 साल से हर रोज उस खतरनाक पुल को पार करते हैं।

यह है पामबन ब्रिज यानि देश नहीं दुनिया का एक अनूठा रेल ट्रैक। एक आश्चर्य और इंजीनयरिंग का अदभुत नमूना। देश के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के मैन लैंड से रामेश्वरम को जोड़ने वाला, जिसकी लंबाई करीब 2.5 किलोमीटर है। हिंद महासागर पर बना ये रेल ट्रैक देश का पहला और लंबा सी लिंक ब्रिज हुआ करता था। पर अब मुंबई ब्रांदा कुर्ला सी लिंक देश का सबसे बड़ा सी लिंक बन गया है। रोज़ हज़ारों लोगों को लेकर ट्रेनें इस बेहद खतरनाक रास्ते से गुज़रती हैं। दोनों तरफ से खुले इस पुल पर चलने वाली ट्रेन के ड्राइवर से गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर ट्रेन डी रेल हुई तो समझिए पुरी ट्रेन हिंद महासागर में समा जाएगी और आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि नुकसान कितना होगा। बावजूद इसके भारतीय रेल के जांवाज ड्राइवर बीते 100 साल से भी ज्यादा वक्त से रोजाना यहां से ट्रेनों को लाते ले जाते हैं। हिंद महासागर में चलने वाली खतरनाक लहरें और समय-समय पर आने वाली चक्रवात और तुफानी हवाएं इस पुल की सबसे बड़ी दुशमन हैं।

पुल का निर्माण ब्रिटिश रेलवे द्वारा 1885 में बनवाना शुरु किया था। जिसके लिए ब्रिटिश इंजिनियरों की टीम के निर्देशन में गुजरात के कच्छ से आए कारीगरों की मदद से इसे खड़ा किया गया था। जिसे 1914 में निर्णाम कार्य पुरा हुआ। तब से लेकर अब तक बीते 100 साल से ज्यादा वक्त ने इस पुल पर रेल गाड़ी चल रही है। शुरुआती दौर में यहां मीटर गेज की ट्रेनें चला करती थीं, लेकिन  2007 में ब्राड गेज में तबदील कर दिया गया। सौ साल पुराने इस पुल में कोई बाउंड्री नहीं है। रेल की पटरी मानो समंदर के पानी से थोड़ी ही ऊपर तैरती नजर आती है। पुल पर चलते हुए हर ट्रेन की रफ्तार धीमी कर दी जाती है।

बीते सौ साल से ज्यादा राष्ट्र की सेवा में समर्पित ये रेल पुल इंजिनियरिंग के लिहाज से बेहद अहम है। दुनिया का सबसे खतरनाक कहा जाने वाला ये रेल ट्रैक 1964 में आई तुफान में तबाह हो गया था, पर मेट्रो मैन के नाम से मशहुर उस वक्त भारतीय रेलवे के इंजिनियरींग विभाग में तैनात ई-त्रीधरन के नेतृत्व में इंजिनियर्स महज़ 46 दिन में इस पुल को फिर से चालू कर दिया था। तब से लेकर अब तक साइक्लोन और दुसरे बाहरी खतरों की वजह से कई बार ये पुल क्षतिग्रस्त हुआ पर रिपेयर्स होने के बाद फिर से इस पर ट्रेनें चला दी जाती हैं। दुनिया का सबेस बड़े रेल नेटवर्क में ये सबसे गजब ट्रेन सफर है।

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