अफगान ज़िहादियों को समर्थन पाक की भूल, भारत के साथ संबंध सुधारने होंगे-हिना रब्बानी

नई दिल्ली (27 जून): पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार  ने नवाज़ सरकार नीति और नीयत पर सवाल खड़े किये हैं। अमेरिका और दुनिया के बाकी बड़े देशों में पाकिस्तान की गिरती साख और भारत के साथ संबंधों में फिर से बढ़ती दूरी के वक्त ख़ार के बयानों का कुछ लोग खास मतलब निकाल रहे हैं। बहरहाल, एक तरफ जहां पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार ने कहा है कि कश्मीर को लड़ाई से नहीं जीता सकता। कश्मीर मसलह का हल निकालने के लिए भारत के साथ बात-चीत की टेबुल पर बैठना होगा।

भारत के साथ बात-चीत के लिए बैठने से पहले उसके साथ सद्भावपूर्ण संबंध और माहौल बनाना होगा। परोक्ष रूप से हिना रब्बानी खा़र ने भारत में हो रही आतंकी घटनाओँ पर रोक लगाने तथा पाकिस्तान में बैठे आतंकियों पर लगाम लगाने की बात कही है। क्यों कि भारत हमेशा से कहता रहा है कि बात-चीत से पहले पाकिस्तान को परस्पर भरोसे का माहौल बनाना होगा। पाकिस्तानी जियो टीवी के साथ हिना रब्बानी ख़ार की बात-चीत को 'डॉन'अखबार ने आज के अंक में प्रकाशित किया है। पाकिस्तान सरकार पर आर्मी के प्रभाव पर पूछे गये सवाल पर हिना ने सिर्फ इतना कहा कि यह देश के नीति निर्धारोकों का विषय है कि   वो मिलिट्री को उस हद तक आगे आने दें जितनी उसकी जरूरत है।

हालांकि ख़ार ने यह भी कहा कि कश्मीर का मुद्दा तभी सुलझ सकता है जब भारत में बीजेपी की सरकार और पाकिस्तान में मिलिट्री शासन हो। उन्होंने मुशर्रफ का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर मसले पर नरम रुख रखते हुए भारत के साथ जितना आगे वो बढ़ चुके थे, उतना आगे तक पाकिस्तान की कोई सरकार नहीं जा सकी है। इंडो-अमरीकी संबंधों पर ख़ार ने कहा कि भारत के लोगों की ताकत और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं से प्रभावित होकर अमेरिका भारत की तरफ झुका है। जो लोग कहते हैं कि बाज़ारवाद, मिलिट्री बेनिफिट्स या न्यूक्लियर पॉवर की वज़ह से अमेरिका भारत की ओर झुका है तो यह गलत है। अगर हम भारत से प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं तो हमें अपनी लोकतांत्रिक शक्तियों को सुदृढ़ करना होगा। ख़ार ने कहा कि अफगानिस्तानी ज़िहाद को समर्थन देना पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल थी। देखें वीडियो क्या-क्या कहा हिना रब्बानी ने-

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=C9X38_rm3P4[/embed]