पाकिस्तान का दुनिया को धोखा, बिजली के नाम पर बना रहा है परमाणु बम

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (26 अक्टूबर): पाकिस्तान की ऐसी ना'पाक' साजिश जो भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। आज हम इसी साजिश का खुलासा करने जा रहे हैं। कैसे पाकिस्तान बिजली के नाम पर बना रहा है परमाणु बम? कैसे पाकिस्तान दुनिया की आंखों में झौंक रहा है धूल? पाकिस्तान और ज्यादा और बड़े परमाणु बम बनाने की कर रहा है तैयारी। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए पाकिस्तान की इस साजिश का पर्दापाश किया था। वैश्विक सुरक्षा पर शोध करने वाली संस्था 'IHS जेन्स इंटेलिजेंस' ने सैटेलाइट तस्वीरें प्रकाशित की थीं। IHS जेन्स इंटेलिजेंस के मुताबिक पाकिस्तान इस्लामाबाद से करीब 30 किलोमीटर दूर कहुटा में नई न्यूक्लियर साइट बना रहा है। इसकी पुष्टी अमेरिकी सैन्य सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों ने भी की है। माना जाता है आज की तारीख में पाकिस्तान के पास 120 से ज्यादा न्यूक्लियर बम हैं जो भारत, इजरायल और उत्तरी कोरिया से ज्यादा है। 

कैसे बिजली के नाम पर PAK ने बनाए बम... - जानकार मानते हैं कि ज्यादा यूरेनियम एनरिचमेंट परमाणु बम बनाने के लिए हो रहा है। - पाकिस्तान के पास 2750 किलो परमाणु हथियार बनाने वाला उच्च सवंर्धित यूरेनियम है। - पाकिस्तान हर साल 150 किलोग्राम उच्च सवंर्धित यूरेनियम विकसित कर रहा है। - रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने 140 किलोग्राम प्लूटोनियम का उत्पादन किया है। - ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के पास करीब 120 परमाणु बम हैं। - पाकिस्तान के कहुटा और गोलरा में यूरेनियम एनरिचमेंट रिसर्च सेंटर। - इसके अलावा चश्मा और खुशाब में प्लूटोनियम उत्पादन केंद्र है।  - रावलपिंडी में परमाणु तकनीक विकास केंद्र,सरगोधा में चीनी M-11 मिसाइलों का भंडार। - चगाई पहाड़ियों पर परमाणु परीक्षण केंद्र, तरवाना में मिसाइल उत्पादन केंद्र। - साफ है पाकिस्तान के कई इलाकों में लगातार परमाणु हथियारों पर काम चल रहा है।  - पाकिस्तान के ज्यादातर परमाणु हथियार पंजाब इलाके में छिपा कर रखे गए हैं। - पाकिस्तान का पंजाब इलाका ही तालिबान के निशाने पर सबसे ज्यादा रहा है।

न्यूक्लियर एनर्जी के नाम पर PAK का झूठ... - पाकिस्तान में 22 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। - जबकि 9 परमाणु संयत्रों में केवल 1300 मेगावाट उत्पादन होता है। - कराची के खुशाब में चार परमाणु संयत्र काम कर रहा है। - कराची में आम दिनों में 4 से 10 घंटे तक बिजली कटती है। - पंजाब के मिंयावली में चार चश्मा परमाणु संयत्र काम कर रहे हैं। - लेकिन फैसलाबाद, पेशावर, सरगोदा और मिंयावली में 8-8 घंटे बिजली नहीं आती।

चीन भी दे चुका है PAK को 'Nuclear Reactors' चीन ने पाकिस्तान को न्यूक्लियर रिएक्टर दिए है। वही न्यूक्लियर रिएक्टर जिसका पाकिस्तान बिजली बनाने की जगह परमाणु बम बनाने में इस्तेमाल करता रहा है। हाल ही में जारी आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (ACA) की रिपोर्ट ने किया है खुलासा। रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में NPT रिव्यू कॉन्फ्रेंस के दौरान रखे प्रपोजल को दरकिनार करते हुए चीन ने पाकिस्तान से 2013 में न्यूक्लियर रिएक्टर देने की डील की थी। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (ACA) ने अपनी रिपोर्ट में चीन के इस कदम को NPT के नियमों के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 'चीन एक ऐसे देश (पाकिस्तान) को ये रिएक्टर्स दे रहा है जो इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के मानकों पर खरा नहीं उतरता।'

Chashma 3 प्लांट के लिए दिए न्यूक्लियर रिएक्टर...ACA की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान के साथ Chashma 3 न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए 2013 में करार किया था। चीन ने पाकिस्तान को Chashma 3 न्यूक्लियर पावर कॉम्प्लेक्स के लिए अभी तक 6 परमाणु रिएक्टर उपलब्ध कराए हैं। 2004 से लेकर अभी तक चीन की NSG की सदस्यता इस मामले में आड़े नहीं आई है। चीन ने पाकिस्तान को परमाणु रिएक्टरों की सप्लाई के लिए 2003 की डील को आधार बनाया है, हालांकि तब चीन NSG का सदस्य नहीं था।

कहां है Chashma न्यूक्लियर प्लांट...साल 2000 मेंचीन की सहायता से पाकिस्तान ने चश्मा में न्यूक्लियर प्लांट की स्थापना की थी। चश्मा न्यूक्लियर प्लांट पाक पंजाब के जिले मियांवाली में स्थित है जो राजधानी इस्लामाबाद से 280 किमी दूर है और दिल्ली से 680 किमी दूर। सितम्बर 2000 से यह प्लांट पूरी तरह से काम कर रहा है। इसके बाद 2011 में चीन ने चश्मा न्यूक्लियर पावर प्लांट नंबर 2 का निर्माण करवाया। जून 2016 में इसके तीसरे परमाणु सयंत्र पर काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा चौथे प्लांट पर भी काम चल रहा है जिसके मार्च 2017 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

चीन की मदद से पाकिस्तान ने बनाए Nuclear Bombs... चीन पाकिस्तान का व्यापारिक ही नहीं रणनीतिक साझेदार भी है। चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य गठजोड़ भारत के लिए एक प्रमुख रणनीतिक चुनौती बन चुकी है। चीन को पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियार कार्यक्रम में प्रत्यक्ष तौर पर सहायता के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान को परमाणु हथियारों के विकास के लिए सामान, न्यूक्लियर वार-हेड डिजाइन और कम से कम दो न्यूक्लियर बमों के लिए पर्याप्त HEU (अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम) और दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक मुहैया कराने में भी चीन का ही हाथ है।

पाकिस्तान का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम... - पाकिस्तान में 1955 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना हुई थी। - 1964-1965 में परमाणु ऊर्जा आयोग का पुनर्गठन किया गया। - 1972 में पाकिस्तान ने पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया। - कनाडा की मदद से कराची से 15 किमी दूर पश्चिम में प्लांट स्थापित किया। - कराची परमाणु ऊर्जा स्टेशन की क्षमता 137 मेगावाट बताई गई। - बाद में चीन की मदद से पंजाब के चश्मा परमाणु प्लांट की स्थापना की गई। - सितम्बर 2000 में इसकी उत्पादन क्षमता 335 मेगावाट बताई गई। - चश्मा में तीन और न्यूक्लियर पावर प्लांट काम कर रहे हैं। - पावर प्लांट-2,3 और 4 की उत्पादन क्षमता 340 मेगावाट है।  - पाकिस्तान चीन की सहायता से रावलपिंडी के पास खुशाब में संयंत्र लगा चुका है। - खुशाब में भी चार परमाणु संयंत्र पहले से ही काम कर रहे हैं। - इन चारों पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट है।  - इसके अलावा पाकिस्तान कराची में दो और परमाणु संयंत्र की योजना बना रहा है। - पाकिस्तान में कुल 9 परमाणु संयत्र काम कर रहे हैं। - लेकिन कुल बिजली उत्पादन का 3.5 फीसद ही इसमे पैदा होती है।